रूस ने किया सारमत परमाणु मिसाइल का परीक्षण

रूस ने किया सारमत परमाणु मिसाइल का परीक्षण

रूस ने 12 मई 2026 को अपनी अत्याधुनिक सारमत सुपर-हेवी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण आर्कान्जेल्स्क क्षेत्र स्थित प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से किया गया। रूस के अनुसार मिसाइल ने कामचटका प्रायद्वीप के कुरा परीक्षण क्षेत्र में अपने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा। इस परीक्षण को रूस के परमाणु बलों के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

क्या है सारमत मिसाइल

सारमत एक तरल ईंधन से चलने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम है। इसे रूस की सामरिक मिसाइल सेनाओं के लिए विकसित किया गया है। नाटो ने इसे एसएस-29 सैटन-2 नाम दिया है। यह मिसाइल सोवियत काल की आर-36एम2 वोयेवोडा मिसाइल की जगह लेने के लिए तैयार की गई है, जिसे नाटो एसएस-18 सैटन कहता था। सारमत मिसाइल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह एक साथ कई परमाणु वारहेड ले जा सके और दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम हो। इसकी मारक क्षमता और तकनीकी विशेषताओं के कारण इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में गिना जाता है।

परीक्षण स्थल और तैनाती योजना

प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम रूस का प्रमुख सैन्य अंतरिक्ष और मिसाइल प्रक्षेपण केंद्र है। इसका उपयोग लंबे समय से मिसाइल परीक्षण और अंतरिक्ष अभियानों के लिए किया जाता रहा है। वहीं कुरा परीक्षण क्षेत्र रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप में मौजूद है, जहां लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण किया जाता है। रूस की योजना वर्ष 2026 के अंत तक क्रास्नोयार्स्क क्राय के उजूर क्षेत्र में पहले सारमत मिसाइल रेजिमेंट को तैनात करने की है। यह क्षेत्र रूस की सामरिक मिसाइल सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

परीक्षणों में आई चुनौतियां

सारमत कार्यक्रम को कई तकनीकी चुनौतियों और देरी का सामना भी करना पड़ा है। सितंबर 2024 में एक परीक्षण असफल होने की खबर सामने आई थी, जिसमें प्रक्षेपण स्थल पर लगभग 60 मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया था। इसके अलावा नवंबर 2025 में भी एक संदिग्ध विफलता की जानकारी मिली थी, जब मिसाइल उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हालांकि रूस का दावा है कि सारमत मिसाइल की मारक क्षमता 35,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है, जिससे यह दुनिया के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम बनती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सारमत एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम है।
  • नाटो ने सारमत मिसाइल को एसएस-29 सैटन-2 नाम दिया है।
  • यह मिसाइल सोवियत काल की आर-36एम2 वोयेवोडा की जगह ले रही है।
  • कुरा परीक्षण क्षेत्र रूस के सुदूर पूर्व स्थित कामचटका प्रायद्वीप में है।

रूस का यह परीक्षण वैश्विक सामरिक संतुलन और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सारमत मिसाइल की तैनाती से रूस अपनी सामरिक शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Originally written on May 13, 2026 and last modified on May 13, 2026.

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