मिल्की वे में छिपी प्राचीन बौनी आकाशगंगा ‘लोकी’ के संकेत

मिल्की वे में छिपी प्राचीन बौनी आकाशगंगा ‘लोकी’ के संकेत

मई 2026 में प्रकाशित एक नए खगोलीय अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा के भीतर छिपी एक प्राचीन बौनी आकाशगंगा ‘लोकी’ के अस्तित्व की संभावना जताई है। यह शोध रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ। वैज्ञानिकों ने सूर्य से लगभग 2 किलोपार्सेक दूरी पर स्थित 20 धातु-गरीब तारों के रासायनिक और कक्षीय आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।

क्या होती है बौनी आकाशगंगा

बौनी आकाशगंगा यानी ड्वार्फ गैलेक्सी ऐसी छोटी आकाशगंगा होती है, जिसमें सामान्य बड़ी आकाशगंगाओं की तुलना में कम तारे और कम द्रव्यमान होता है। मिल्की वे जैसी विशाल आकाशगंगाएं समय-समय पर इन छोटी आकाशगंगाओं को अपने भीतर समाहित करती रहती हैं। इस प्रक्रिया को ब्रह्मांड विज्ञान में हायरार्किकल गैलेक्सी फॉर्मेशन कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मिल्की वे पहले भी कई बौनी आकाशगंगाओं को अपने भीतर मिला चुकी है। इनमें गैया-एन्सेलाडस, सिक्वोइया, थामनोस और क्रैकन जैसी आकाशगंगाएं शामिल हैं। इन विलय अवशेषों की पहचान तारों की रासायनिक संरचना, गति और आयु के आधार पर की जाती है।

तारों से मिले लोकी के संकेत

लोकी से जुड़े 20 तारों में अलग-अलग प्रकार की कक्षीय गति देखी गई। इनमें 11 तारे मिल्की वे की घूर्णन दिशा में घूम रहे हैं, जबकि 9 तारे विपरीत दिशा में गति कर रहे हैं। वैज्ञानिक इसे महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं क्योंकि इस प्रकार की मिश्रित गति किसी बाहरी आकाशगंगा के विलय की ओर इशारा करती है। इन तारों में सुपरनोवा और न्यूट्रॉन तारा विलय से जुड़े रासायनिक तत्वों के प्रमाण भी मिले हैं। वहीं इनमें श्वेत बौने तारों की गतिविधियों के संकेत नहीं पाए गए, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि यह मूल प्रणाली बहुत कम समय तक अस्तित्व में रही होगी।

स्पेक्ट्रोस्कोपी से हुआ अध्ययन

इस शोध में ईएसपीएडीओएनएस नामक उच्च-रिजॉल्यूशन स्पेक्ट्रोपोलरिमीटर का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से वैज्ञानिकों ने तारों में मौजूद 23 प्रकार के रासायनिक तत्वों का विश्लेषण किया। स्पेक्ट्रोस्कोपी खगोल विज्ञान की ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए तारों और अन्य खगोलीय पिंडों से आने वाले प्रकाश का अध्ययन कर उनकी संरचना, तापमान और गति का पता लगाया जाता है। कई तारों में समान रासायनिक अनुपात मिलने पर वैज्ञानिक उनके साझा मूल का अनुमान लगाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मिल्की वे एक बार्ड स्पाइरल गैलेक्सी है और यह लोकल ग्रुप का हिस्सा है।
  • गैया-एन्सेलाडस मिल्की वे में विलय हुई सबसे प्रसिद्ध प्राचीन बौनी आकाशगंगाओं में से एक है।
  • न्यूट्रॉन तारा विलय से सोना और प्लैटिनम जैसे भारी तत्व बनते हैं।
  • धातु-गरीब तारे ब्रह्मांड के सबसे पुराने तारों में गिने जाते हैं।

यदि भविष्य के अध्ययनों में लोकी के अस्तित्व की पुष्टि होती है, तो यह मिल्की वे के विकास और प्रारंभिक ब्रह्मांड के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि तारों की रासायनिक संरचना के जरिए अरबों वर्ष पुराने आकाशगंगा विलयों का पता लगाया जा सकता है।

Originally written on May 13, 2026 and last modified on May 13, 2026.

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