सरकार ने तेल और गैस उत्पादन पर नई रॉयल्टी दरें लागू कीं

सरकार ने तेल और गैस उत्पादन पर नई रॉयल्टी दरें लागू कीं

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 8 मई 2026 को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन पर नई रॉयल्टी दरों की अधिसूचना जारी की। यह नई व्यवस्था भारत के ऑनशोर, ऑफशोर, डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर लागू होगी। सरकार का उद्देश्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है।

क्या होती है रॉयल्टी

रॉयल्टी वह वैधानिक भुगतान होता है, जो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बदले सरकार को दिया जाता है। तेल और गैस क्षेत्र में यह भुगतान उत्पादन मात्रा या वेल-हेड मूल्य के आधार पर निर्धारित किया जाता है। वेल-हेड मूल्य का अर्थ उत्पादन स्थल पर गैस की कीमत से है, जिसमें परिवहन और विपणन लागत शामिल नहीं होती। यह व्यवस्था सरकार को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से राजस्व प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान करती है।

कच्चे तेल और गैस पर नई दरें

नई अधिसूचना के अनुसार ऑनशोर कच्चे तेल उत्पादन पर रॉयल्टी दर को 16.66 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑफशोर कच्चे तेल पर रॉयल्टी 9.09 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है। प्राकृतिक गैस पर रॉयल्टी दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने गैस के वेल-हेड मूल्य की गणना के लिए फ्लैट डिडक्शन फॉर्मूला भी लागू किया है, जिससे मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जा सके।

डीपवॉटर क्षेत्रों को बड़ी राहत

डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने विशेष छूट दी है। डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी और हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत आवंटित क्षेत्रों में पहले सात वर्षों तक कच्चे तेल, कंडेनसेट और प्राकृतिक गैस उत्पादन पर शून्य रॉयल्टी लागू होगी। सात वर्ष पूरे होने के बाद इन क्षेत्रों में क्रमशः 5 प्रतिशत और 2 प्रतिशत की रॉयल्टी दर लागू की जाएगी। इससे पूंजी-गहन समुद्री परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी रणनीति

भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। नई रॉयल्टी व्यवस्था का उद्देश्य निजी और सार्वजनिक कंपनियों को खोज और उत्पादन गतिविधियों में अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन और ऑयल इंडिया जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भारत के अपस्ट्रीम तेल और गैस क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रॉयल्टी प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर सरकार को दिया जाने वाला वैधानिक भुगतान है।
  • डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी अविकसित हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों के उपयोग से जुड़ी नीति है।
  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी राजस्व साझेदारी मॉडल पर आधारित है।
  • भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और गैस के रूप में आयात करता है।

नई रॉयल्टी नीति से भारत में घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार को मदद मिलेगी।

Originally written on May 13, 2026 and last modified on May 13, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *