यूपी में गंगा बाढ़ क्षेत्र की सीमांकन प्रक्रिया पूरी, नदी संरक्षण को नई मजबूती

यूपी में गंगा बाढ़ क्षेत्र की सीमांकन प्रक्रिया पूरी, नदी संरक्षण को नई मजबूती

उत्तर प्रदेश ने गंगा नदी के 700 किलोमीटर लंबे बाढ़ क्षेत्र का भौतिक सीमांकन पूरा कर लिया है। यह काम उन्नाव से बलिया तक 13 जिलों में किया गया है, जिसमें जमीन पर 7,350 पिलर लगाकर सीमा तय की गई। इस प्रगति की जानकारी अगस्त 2026 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष रखी गई।

गंगा के बाढ़ क्षेत्र की पहचान क्यों अहम है

नदी के बाढ़ क्षेत्र यानी फ्लडप्लेन वह निचला इलाका होता है जो जलस्तर बढ़ने पर पानी ग्रहण कर सकता है। ऐसे क्षेत्रों की पहचान इसलिए जरूरी मानी जाती है ताकि नदी किनारे अनियंत्रित निर्माण, अतिक्रमण और भूमि उपयोग में अनियमितता पर निगरानी रखी जा सके। गंगा जैसी बड़ी नदी के मामले में यह काम नदी-पर्यावरण, बाढ़ प्रबंधन और शहरी-ग्रामीण नियोजन, तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

राज्य के अनुसार, यह सीमांकन गंगा के लंबे प्रवाह क्षेत्र में प्रशासनिक नियंत्रण और पर्यावरणीय संरक्षण को मजबूत करेगा। सीमांकन पूरा होने के बाद अब संबंधित क्षेत्रों में वास्तविक सीमा को जमीन पर पहचाना जा सकेगा, जिससे निगरानी और कार्रवाई आसान होगी।

एनजीटी में क्या हुआ और किसने रिपोर्ट दी

इस प्रगति को राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सुनवाई में एनजीटी की पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद शामिल थे। उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने स्थिति हलफनामा दाखिल कर बताया कि गंगा बाढ़ क्षेत्र की भौतिक सीमा-निर्धारण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

एनजीटी एक वैधानिक पर्यावरणीय न्यायाधिकरण है, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी। पर्यावरण, वन, जल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है।

सहायक नदियों पर भी काम जारी

राज्य रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा की कई सहायक नदियों के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन भी पूरा किया जा चुका है। इनमें यमुना, रामगंगा, बेतवा, सुवाव, टेढ़ी, बूढ़ी गंगा, सोलानी और खोखरी शामिल हैं। वहीं काली, वरुणा, हिंडन, पांडु और नून नदियों के लिए यह काम अभी जारी है।

यह पहल केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नदी तंत्र के संरक्षण से जुड़ा कदम भी है। जब बाढ़ क्षेत्र स्पष्ट रूप से चिन्हित होते हैं, तो नदी किनारे अवैध निर्माण रोकने, संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और भविष्य की जल-प्रबंधन योजना बनाने में मदद मिलती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गंगा भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों में से एक है और उत्तर भारत के विशाल मैदान से होकर बहती है।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई थी।
  • नदी के फ्लडप्लेन क्षेत्र बाढ़, पारिस्थितिकी और भूमि-उपयोग नियमन से सीधे जुड़े होते हैं।
  • भौतिक सीमांकन में पिलर लगाकर जमीन पर वास्तविक सीमा चिन्हित की जाती है।

उत्तर प्रदेश में गंगा बाढ़ क्षेत्र का यह सीमांकन नदी संरक्षण और अतिक्रमण नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। आने वाले समय में इससे नदी किनारे विकास कार्यों और पर्यावरणीय निगरानी के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

Originally written on August 27, 2026 and last modified on August 27, 2026.

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