तमिलनाडु में तीन नए हाथी गलियारे, वन्यजीव संरक्षण को मिली नई मजबूती

तमिलनाडु में तीन नए हाथी गलियारे, वन्यजीव संरक्षण को मिली नई मजबूती

तमिलनाडु ने 28 अगस्त 2026 को होसुर वन प्रभाग के कावेरी नॉर्थ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में तीन नए हाथी गलियारों को अधिसूचित किया। ये गलियारे तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एशियाई हाथियों तथा अन्य बड़े स्तनधारियों की पारंपरिक आवाजाही से जुड़े ट्रांस-कावेरी मार्ग का हिस्सा हैं। इस कदम को वन्यजीव संरक्षण, आवासीय संपर्क और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाथी गलियारे क्यों महत्वपूर्ण हैं

हाथी गलियारा उस संकरी वन पट्टी को कहा जाता है जो दो बड़े वन क्षेत्रों को जोड़ती है और हाथियों के मौसमी आवागमन के लिए उपयोग होती है। जब जंगलों के बीच संपर्क टूटता है, तो हाथियों की आवाजाही बाधित होती है, जिससे भोजन, पानी और प्रजनन से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे गलियारे जैविक विविधता बनाए रखने और अलग-अलग हाथी समूहों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

भारत में हाथियों के कई प्रमुख परिदृश्य माने जाते हैं, जिनमें पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, उत्तर बंगाल और ब्रह्मपुत्र घाटी शामिल हैं। तमिलनाडु का यह नया अधिसूचना कदम पश्चिमी घाट क्षेत्र में वन्यजीव संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और प्रशासनिक पहल है।

अधिसूचित तीनों गलियारों का स्वरूप

अधिसूचित गलियारों में पहला जवालागिरी-उलीबंडा-थग्गट्टी गलियारा है, जिसकी लंबाई 18.50 किलोमीटर और चौड़ाई 0.73 किलोमीटर से 3.20 किलोमीटर तक है। इसका क्षेत्रफल 3,241.53 हेक्टेयर है।

दूसरा जवालागिरी-पनै-अंचेट्टी गलियारा है, जो 20.90 किलोमीटर लंबा और 0.80 किलोमीटर से 5.00 किलोमीटर चौड़ा है। इसका कुल क्षेत्रफल 6,881.47 हेक्टेयर है।

तीसरा बिलिक्कल-जवालागिरी गलियारा है, जिसकी लंबाई 2.20 किलोमीटर और चौड़ाई 0.66 किलोमीटर से 1.50 किलोमीटर तक है। यह 196 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है।

कानूनी प्रक्रिया और सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि

मुख्य वन्यजीव वार्डन के अनुसार, ये तीनों गलियारे आरक्षित वन और अभयारण्य की सीमाओं के भीतर आते हैं। अधिसूचना से न तो किसी निजी भूमि, न सार्वजनिक भूमि और न ही किसी राजस्व गांव पर असर पड़ा है। यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे संरक्षण और प्रशासनिक स्पष्टता दोनों को बल मिलता है।

मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 31 जुलाई 2026 को कहा था कि गलियारे की अधिसूचना के लिए अतिक्रमण हटाना पूर्व शर्त नहीं है। इससे पहले 12 जुलाई 2026 को अदालत ने तमिलनाडु सरकार को 41 जमीन-स्तर पर सत्यापित हाथी गलियारों की अधिसूचना प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार ने 8 फरवरी 2025 को राज्य योजना आयोग के वित्तपोषण से एक ग्राउंड-वेरिफिकेशन अध्ययन शुरू किया था। इस अध्ययन में तमिलनाडु हाथी गलियारा समिति द्वारा प्रस्तावित गलियारों की पारिस्थितिक उपयुक्तता की दोबारा जांच की गई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एशियाई हाथी को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • भारत में एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी पाई जाती है।
  • हाथी गलियारे आवासीय विखंडन को कम करने और आबादियों के बीच आनुवंशिक संपर्क बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • मद्रास उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र तमिलनाडु और पुडुचेरी पर है।

कावेरी नॉर्थ वन्यजीव अभयारण्य और होसुर क्षेत्र की यह अधिसूचना तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर वन्यजीव प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे हाथियों की सुरक्षित आवाजाही और संरक्षण प्रयासों को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on August 28, 2026 and last modified on August 28, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *