देहिंग पटकाई में तितलियों की समृद्धि ने बढ़ाई संरक्षण की उम्मीदें

देहिंग पटकाई में तितलियों की समृद्धि ने बढ़ाई संरक्षण की उम्मीदें

असम के देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान में हुई 2026 की जैव विविधता सर्वेक्षण रिपोर्ट ने इस क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि को फिर सामने ला दिया है। सर्वे में यहां 165 तितली प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 37 संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं। यह उपलब्धि बताती है कि देहिंग पटकाई सिर्फ एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की नाजुक और समृद्ध पारिस्थितिकी का अहम हिस्सा है।

देहिंग पटकाई की जैव विविधता का महत्व

देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में फैला है और इसका क्षेत्रफल 234.26 वर्ग किलोमीटर है। यह घने वर्षावन वाले परिदृश्य का हिस्सा है और उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन आवरण के लिए जाना जाता है। ऐसे वन क्षेत्रों में तितलियों की विविधता अधिक मिलना इस बात का संकेत है कि वहां का आवास अभी भी काफी हद तक प्राकृतिक बना हुआ है।

तितलियां लेपिडोप्टेरा गण के कीट हैं, जिसमें पतंगे भी शामिल होते हैं। पर्यावरणीय अध्ययन में इन्हें सूचक प्रजाति माना जाता है, क्योंकि ये आवास में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों के प्रति भी संवेदनशील होती हैं। इसलिए किसी क्षेत्र में तितलियों की संख्या और विविधता वहां की पारिस्थितिक सेहत का संकेत देती है।

बटरफ्लाई ट्रेल में क्या मिला

देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता और बटरफ्लाई ट्रेल का चौथा संस्करण 28 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया। इस सर्वे में असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया और सभी सर्वेक्षण स्थलों पर 260 से अधिक तितली प्रजातियां दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, असम के जयपुर क्षेत्र में 60 से अधिक प्रजातियां, तिरप जिले के देओमाली रेंज में लगभग 57 प्रजातियां, लखीपथार रेंज के सिरिंग मामोरोनी गांव में लगभग 68 प्रजातियां और सराइपुंग रेंज में लगभग 78 प्रजातियां दर्ज की गईं। जयपुर क्षेत्र में कैप्ड लंगूर भी देखा गया, जो इस इलाके की जैव विविधता को और मजबूत करता है।

संरक्षण और शोध के लिए अहम संकेत

भारत में तितलियों की 1,500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के सबसे समृद्ध तितली आवासों में गिना जाता है। असम में कई संरक्षित क्षेत्र हैं, जिनमें राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। ऐसे में देहिंग पटकाई जैसे क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण संरक्षण नीति, आवास प्रबंधन और प्रजाति-आधारित अध्ययन के लिए उपयोगी डेटा उपलब्ध कराते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में स्थित है।
  • इसका क्षेत्रफल 234.26 वर्ग किलोमीटर है।
  • तितलियां लेपिडोप्टेरा गण से संबंधित होती हैं, जिसमें पतंगे भी शामिल हैं।
  • भारत में तितलियों की 1,500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और पूर्वोत्तर क्षेत्र इनमें सबसे समृद्ध माना जाता है।

देहिंग पटकाई में तितलियों की यह बड़ी संख्या बताती है कि असम के वर्षावन आज भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय बने हुए हैं। संरक्षण और सतत निगरानी के बिना ऐसी जैविक संपदा को लंबे समय तक बचाए रखना संभव नहीं होगा।

Originally written on August 27, 2026 and last modified on August 27, 2026.

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