बनासकांठा में बायो-सीएनजी मॉडल प्लांट से ग्रामीण ऊर्जा को नई रफ्तार
गुजरात के बनासकांठा जिले के धनेरा तालुका के विंछीवाड़ी में 26 अगस्त 2026 को नया बनास बायो-सीएनजी मॉडल प्लांट शुरू किया गया। यह परियोजना बनास डेयरी, सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की संयुक्त पहल है। इसके साथ बायो-सीएनजी फिलिंग स्टेशन और देश की पहली ग्रामीण सहकारी मॉडल ‘ग्रामीण भारत टैक्सी’ सेवा का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें नौ वाहन शामिल हैं।
गोबर से ऊर्जा और खाद तक का चक्र
बायो-सीएनजी, जिसे कंप्रेस्ड बायोगैस भी कहा जाता है, जैविक कचरे से तैयार की जाती है। डेयरी आधारित संयंत्रों में इसका प्रमुख कच्चा माल पशु-गोबर होता है। यह प्रक्रिया एनारोबिक डाइजेशन पर आधारित होती है, यानी बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों का विघटन किया जाता है। इससे बायोगैस बनती है और उप-उत्पाद के रूप में जैविक खाद भी मिलती है, जिसका उपयोग कृषि में किया जा सकता है।
विंछीवाड़ी का यह नया संयंत्र प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन तक पशु-गोबर संसाधित करने के लिए तैयार किया गया है। इससे न केवल स्वच्छ ईंधन का उत्पादन होगा, बल्कि डेयरी क्षेत्र के अपशिष्ट प्रबंधन को भी अधिक संगठित और उपयोगी बनाया जा सकेगा।
सहकारी मॉडल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा
बनास डेयरी बनासकांठा में एक बड़े सहकारी दुग्ध नेटवर्क का संचालन करती है, जो गुजरात के प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। सुजुकी समर्थित इस बायो-सीएनजी पहल से जुड़ा निवेश लगभग 250 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस नेटवर्क की शुरुआत दामा स्थित पहले संयंत्र से हुई थी और अब यह बढ़कर चार चालू संयंत्रों तक पहुंच चुका है। इनकी संयुक्त दैनिक क्षमता 340 मीट्रिक टन है। यह विस्तार दिखाता है कि डेयरी, ऊर्जा और परिवहन को एक ही सहकारी ढांचे में जोड़कर ग्रामीण विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।
कौन-कौन रहा मौजूद और क्यों है यह परियोजना अहम
उद्घाटन समारोह में सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन तोशिहिरो सुजुकी, बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी और NDDB के चेयरमैन मनीष पटेल मौजूद रहे। NDDB एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1965 में हुई थी और इसका मुख्यालय आनंद, गुजरात में है।
सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन जापान की एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी है, जिसकी स्थापना 1909 में हुई थी। इस तरह की परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण रोजगार, जैविक कचरे के उपयोग और कृषि के लिए खाद उपलब्ध कराने जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ जोड़ती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बायो-सीएनजी का उत्पादन जैविक कचरे से एनारोबिक डाइजेशन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।
- NDDB की स्थापना 1965 में हुई थी और इसका मुख्यालय आनंद, गुजरात में है।
- बनासकांठा जिला गुजरात के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित है।
- बायोगैस संयंत्रों से मिलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में उर्वरक के रूप में किया जाता है।
बनासकांठा का यह मॉडल प्लांट दिखाता है कि डेयरी अपशिष्ट को ऊर्जा और खाद में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। सहकारी ढांचे के जरिए यह पहल स्वच्छ ईंधन और स्थानीय परिवहन दोनों के लिए नई दिशा देती है।