ताडोबा में 216 स्टार कछुओं की वापसी से संरक्षण को नई दिशा

ताडोबा में 216 स्टार कछुओं की वापसी से संरक्षण को नई दिशा

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में 23 अगस्त 2026 को 216 भारतीय स्टार कछुओं को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। ये सभी कछुए तस्करी से बचाए गए थे और लंबे पुनर्वास के बाद उन्हें जंगल में पुनर्स्थापित किया गया। इस पहल के साथ प्रोजेक्ट STRIPES की शुरुआत भी हुई, जिसे महाराष्ट्र वन विभाग और रेस्किंक एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ वेलफेयर ने मिलकर आगे बढ़ाया है।

तस्करी से संरक्षण तक की यात्रा

भारतीय स्टार कछुआ, जिसका वैज्ञानिक नाम Geochelone elegans है, भारत और श्रीलंका में पाया जाने वाला स्थलीय सरीसृप है। इसके खोल पर बने तारे जैसे पैटर्न के कारण इसे यह नाम मिला है। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान मुंबई और ठाणे से जब्त किए गए इन कछुओं को पहले ठाणे ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर, TCPCA, PAWS और WWA जैसी सुविधाओं में रखा गया, जहां उनकी देखभाल, स्वास्थ्य जांच और पुनर्वास किया गया।

प्रोजेक्ट STRIPES का उद्देश्य क्या है

STRIPES का पूरा नाम Star Tortoise Repatriation Initiative Protecting Endangered Species है। यह एक संरचित संरक्षण कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य तस्करी से बचाए गए स्टार कछुओं को सुरक्षित तरीके से उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ना है। इस प्रक्रिया में परिवहन, चिकित्सकीय निगरानी, पुनर्वास और रिलीज प्लानिंग शामिल होती है।

इस बार कछुओं को 800 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर एक विशेष वन्यजीव एंबुलेंस के जरिए ताडोबा लाया गया। यात्रा के दौरान उनकी नमी और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई। पहुंचने के बाद मेडिकल जांच की गई और फिर उन्हें चरणबद्ध तरीके से छोड़ा गया।

ताडोबा क्यों चुना गया

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। इसमें ताडोबा नेशनल पार्क और अंधारी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। यहां शुष्क पर्णपाती वन, बांस के झुरमुट और जलस्रोत ऐसे आवास बनाते हैं, जो कई प्रजातियों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इसी वजह से यह क्षेत्र केवल बाघ संरक्षण ही नहीं, बल्कि अन्य वन्यजीव प्रजातियों के पुनर्स्थापन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिलीज योजना में नर और मादा कछुओं का अनुपात वैज्ञानिक तरीके से तय किया गया, ताकि भविष्य में आबादी प्रबंधन बेहतर ढंग से हो सके। यह पहल बताती है कि केवल जब्ती पर्याप्त नहीं होती, बल्कि बचाए गए वन्यजीवों को सही आवास में वापस लाना भी संरक्षण का अहम हिस्सा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय स्टार कछुआ Testudinidae परिवार का सदस्य है और इसकी पहचान खोल पर बने तारे जैसे पैटर्न से होती है।
  • यह प्रजाति भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV में शामिल है।
  • भारतीय स्टार कछुआ CITES के तहत भी संरक्षित प्रजातियों में आता है, जिससे इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण रहता है।
  • ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित है और यह राज्य के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व में गिना जाता है।

यह पुनर्स्थापन अभियान वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, वैज्ञानिक पुनर्वास और आवास-आधारित संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण है। ऐसे प्रयास संकटग्रस्त प्रजातियों को केवल बचाते ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रकृति में फिर से स्थापित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

Originally written on August 27, 2026 and last modified on August 27, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *