यूएपीए के तहत 23 पाकिस्तान स्थित आतंकियों को घोषित किया गया आतंकी

यूएपीए के तहत 23 पाकिस्तान स्थित आतंकियों को घोषित किया गया आतंकी

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 4 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान स्थित 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत नामित आतंकवादी घोषित किया है। ये सभी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवाद के वित्तपोषण, घुसपैठ और आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना है।

यूएपीए क्या है और धारा 35 का महत्व

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 भारत का प्रमुख आतंकवाद निरोधक कानून है। यह कानून उन व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करते हैं। यूएपीए की धारा 35 केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर उसका नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची (फोर्थ शेड्यूल) में शामिल करने का अधिकार देती है। इस सूची में शामिल व्यक्तियों पर विभिन्न कानूनी प्रतिबंध लागू हो जाते हैं और सुरक्षा एजेंसियों को उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का अधिकार प्राप्त होता है।

किन संगठनों और आतंकियों के नाम शामिल हैं

नई सूची में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई प्रमुख आतंकियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद तथा राना इफ्तिखार जैसे नाम प्रमुख हैं। इनमें से कुछ आतंकी पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सक्रिय बताए जाते हैं, जबकि अन्य पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों से आतंकवादी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन पर घुसपैठ, आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, ड्रोन के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति, आतंकवादी हमलों की योजना बनाने तथा आतंकवाद के वित्तपोषण जैसे गंभीर आरोप हैं।

कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों की शक्तियां

किसी व्यक्ति को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियां उसकी संपत्तियों को जब्त करने, बैंक खातों और वित्तीय स्रोतों को फ्रीज करने, हथियारों तक पहुंच रोकने तथा अन्य कानूनी कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हो जाती हैं। इस कदम का उद्देश्य आतंकवादी नेटवर्क की आर्थिक और परिचालन क्षमता को कमजोर करना है। सरकार के अनुसार इस नई अधिसूचना के बाद यूएपीए के तहत नामित व्यक्तिगत आतंकवादियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।

जम्मू-कश्मीर से जुड़े आतंकियों का विवरण

नामित 23 आतंकियों में से 11 मूल रूप से जम्मू-कश्मीर से संबंधित हैं। इनमें सात वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में और चार पाकिस्तान में मौजूद बताए गए हैं। शेष सभी नामित व्यक्ति पाकिस्तानी नागरिक हैं। यह तथ्य सीमा पार से संचालित आतंकवादी ढांचे और उसके नेटवर्क की ओर संकेत करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 भारत का प्रमुख आतंकवाद निरोधक कानून है।
  • यूएपीए की धारा 35 केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर उसका नाम चौथी अनुसूची में शामिल करने का अधिकार देती है।
  • यूएपीए की चौथी अनुसूची में नामित व्यक्तिगत आतंकवादियों की सूची दर्ज होती है।
  • नवीनतम अधिसूचना के बाद यूएपीए के तहत नामित व्यक्तिगत आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है।

भारत सरकार की यह कार्रवाई आतंकवाद के विरुद्ध उसकी कठोर नीति को दर्शाती है। यूएपीए के तहत आतंकियों को नामित करने से सुरक्षा एजेंसियों को उनके वित्तीय नेटवर्क, संपत्तियों और गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही यह कदम सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की निरंतर और सख्त रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

Originally written on July 4, 2026 and last modified on July 4, 2026.

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