पायरेटेड फिल्मों पर सख्ती: टेलीग्राम को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नोटिस

पायरेटेड फिल्मों पर सख्ती: टेलीग्राम को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नोटिस

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को पायरेटेड फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य ओटीटी सामग्री के अवैध प्रसार को लेकर नोटिस जारी किया। मंत्रालय ने टेलीग्राम से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही प्लेटफॉर्म को कॉपीराइट उल्लंघन करने वाली ऑडियो-विजुअल सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग, पहुंच रोकने और उसे हटाने की प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

ऑनलाइन पायरेसी पर सरकार की सख्ती

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट संरक्षित सामग्री अक्सर चैनलों, ग्रुपों, बॉट्स और विभिन्न अकाउंट्स के माध्यम से साझा की जाती है। इससे फिल्म उद्योग और कंटेंट निर्माताओं को आर्थिक नुकसान होता है। सरकार का मानना है कि ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्लेटफॉर्म को सक्रिय रूप से अवैध सामग्री की पहचान कर उसे हटाने की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

कॉपीराइट और सिनेमैटोग्राफ कानून

भारत में कॉपीराइट उल्लंघन कॉपीराइट अधिनियम, 1957 तथा सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत दंडनीय अपराध है। कॉपीराइट अधिनियम रचनात्मक कार्यों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जबकि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम फिल्मों से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों को नियंत्रित करता है। इन कानूनों का उद्देश्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना और अवैध वितरण पर रोक लगाना है।

सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी

मंत्रालय ने अपने नोटिस में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत निर्धारित ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) के प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। इन नियमों के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल अवैध सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे ऐसी सामग्री की पहचान करना, रिपोर्टिंग की व्यवस्था बनाना, उसकी पहुंच रोकना और बार-बार उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना भी आवश्यक है।

दोहराए जाने वाले उल्लंघनों पर विशेष ध्यान

मंत्रालय के नोटिस में ऐसे दोहराए जाने वाले उल्लंघनकर्ताओं को भी शामिल किया गया है, जिनमें चैनल, ग्रुप, बॉट्स, अकाउंट, एडमिनिस्ट्रेटर और उनसे जुड़े अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल एक-एक चैनल को हटाने जैसी प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। प्लेटफॉर्म से अपेक्षा की गई है कि वह व्यापक और सक्रिय अनुपालन सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में भी कॉपीराइट उल्लंघन को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कॉपीराइट अधिनियम, 1957 भारत में कॉपीराइट संरक्षण से संबंधित प्रमुख कानून है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 फिल्मों से जुड़े कानूनी प्रावधानों को नियंत्रित करता है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में इलेक्ट्रॉनिक शासन और साइबर मामलों से संबंधित मुख्य कानून है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 ऑनलाइन मध्यस्थ प्लेटफॉर्म के लिए ड्यू डिलिजेंस और अनुपालन संबंधी प्रावधान निर्धारित करते हैं।

इससे पहले 11 मार्च 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पायरेसी से जुड़े 3,100 से अधिक चैनलों को तीन घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। अब टेलीग्राम को जारी किया गया नया नोटिस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपीराइट संरक्षण और ऑनलाइन पायरेसी के विरुद्ध सरकार की सख्त नीति को दर्शाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय कॉपीराइट कानून, सूचना प्रौद्योगिकी कानून तथा डिजिटल शासन से जुड़े महत्वपूर्ण समसामयिक घटनाक्रमों में शामिल है।

Originally written on July 4, 2026 and last modified on July 4, 2026.

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