यूएई 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ से बाहर होगा
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने घोषणा की है कि वह 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ दोनों संगठनों से बाहर हो जाएगा। यह फैसला वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। ऐसे समय में यह निर्णय आया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों के कारण तेल बाजार गंभीर अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।
दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल यूएई के इस कदम से वैश्विक तेल कीमतों, आपूर्ति संतुलन और OPEC की आंतरिक शक्ति संरचना पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
यूएई ने बाहर होने का फैसला क्यों लिया
यूएई सरकार के अनुसार यह निर्णय उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि को ध्यान में रखकर लिया गया है। देश अब अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना चाहता है और अपनी बदलती ऊर्जा प्रोफाइल के अनुसार स्वतंत्र नीति अपनाना चाहता है।
यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने कहा कि यह निर्णय वर्तमान और भविष्य के उत्पादन लक्ष्यों पर आधारित है। यूएई लंबे समय से अधिक उत्पादन लचीलापन चाहता था, लेकिन OPEC की कोटा-आधारित व्यवस्था के कारण उसे सीमाएं झेलनी पड़ रही थीं।
बढ़ती उत्पादन क्षमता और विस्तार की योजनाओं के कारण सख्त उत्पादन नियंत्रण अब उसके लिए कम आकर्षक हो गया था।
OPEC और OPEC+ पर प्रभाव
यूएई का बाहर होना OPEC के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 4.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो इसे समूह के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल करती है।
इसके बाहर जाने से OPEC की आपूर्ति नियंत्रित करने और कीमतों को स्थिर रखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। अब सऊदी अरब पर बाजार संतुलन बनाए रखने का अधिक दबाव रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे OPEC का वैश्विक प्रभाव घट सकता है, खासकर तब जब अमेरिका OPEC ढांचे से बाहर रहकर लगातार कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय तनाव
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते निर्यात चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति को संभालता है।
ईरान संघर्ष के कारण यहां जहाजरानी जोखिम बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा लागत भी बढ़ रही है। यूएई और सऊदी अरब के बीच आर्थिक हितों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा भी इस निर्णय की पृष्ठभूमि में देखी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- OPEC की स्थापना 1960 में हुई थी और इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है।
- यूएई ने 1967 में अबू धाबी के रूप में OPEC में प्रवेश किया था।
- OPEC+ में OPEC देशों के साथ रूस जैसे बड़े उत्पादक भी शामिल होते हैं।
यूएई का OPEC और OPEC+ से बाहर होना केवल एक ऊर्जा निर्णय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि अब कई देश सामूहिक संगठनात्मक अनुशासन से अधिक अपने राष्ट्रीय ऊर्जा हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले समय में इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों पर दिखाई देगा।