भारत-वियतनाम संबंधों को नई दिशा देगा तो लाम का दौरा
भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम 5 से 7 मई तक भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास में हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध लगातार प्रगाढ़ हुए हैं और यह यात्रा भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
उच्च स्तरीय कूटनीतिक सहभागिता
राष्ट्रपति तो लाम, जो वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं, इस यात्रा के दौरान एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आएंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। अप्रैल 2026 में पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। इस दौरान उन्हें औपचारिक स्वागत दिया जाएगा और कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
प्रमुख बैठकें और कार्यक्रम
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति तो लाम के बीच व्यापक वार्ता होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भी उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके अलावा, वियतनामी राष्ट्रपति बोधगया और मुंबई जैसे महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा करेंगे, जो सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष
यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच 2016 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है। पिछले एक दशक में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में दोनों देशों की साझा रुचि है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
भारत और वियतनाम के बीच यह बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक रणनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार, तकनीकी आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे इस दौरे के केंद्र में रहेंगे। यह भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी।
- वियतनाम भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” का एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
- बोधगया बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां विश्वभर से श्रद्धालु आते हैं।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत और वियतनाम के बीच यह राजकीय यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाली साबित होगी। इससे न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी दोनों देशों की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।