न्यूक्लियर लायबिलिटी पर SHANTI नियमों से बदलेगा भारत का परमाणु ढांचा
परमाणु ऊर्जा विभाग ने 14 अगस्त 2026 को सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी (SHANTI) नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। यह प्रस्ताव भारत में नागरिक परमाणु दायित्व, बीमा, वित्तीय सुरक्षा और तकनीकी स्वीकृति से जुड़े पुराने ढांचों को एक साथ समेटने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मसौदे का फोकस परमाणु प्रतिष्ठानों के ऑपरेटर की जिम्मेदारी, मुआवजा व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को अधिक स्पष्ट बनाना है।
नए नियमों का मुख्य ढांचा
मसौदा नियमों के अनुसार किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान के ऑपरेटर को नागरिक परमाणु क्षति के लिए बीमा पॉलिसी, वित्तीय सुरक्षा या दोनों बनाए रखना होगा। ऑपरेटर की जिम्मेदारी सख्त दायित्व के सिद्धांत पर आधारित होगी, यानी क्षति होने पर मुआवजे के लिए लापरवाही साबित करना जरूरी नहीं होगा। यह व्यवस्था परमाणु सामग्री के परिवहन के दौरान होने वाली क्षति पर भी लागू होगी।
भारत के परमाणु दायित्व ढांचे में ऑपरेटर की जवाबदेही, वित्तीय सुरक्षा और मुआवजा तंत्र केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। SHANTI नियम इन्हीं पहलुओं को अधिक व्यवस्थित और अद्यतन रूप देने का प्रयास करते हैं।
बीमा, गारंटी और वित्तीय सुरक्षा की शर्तें
मसौदे में यह भी कहा गया है कि ऑपरेटर की वित्तीय सुरक्षा अपरिवर्तनीय होनी चाहिए और तब तक प्रभावी रहनी चाहिए जब तक सभी खर्चित ईंधन को भंडारण पूलों से हटा नहीं लिया जाता। यदि सुरक्षा के रूप में शेयर, बॉन्ड या अन्य वित्तीय साधन केंद्र सरकार के पास गिरवी रखे जाते हैं, तो ऑपरेटर को 1:1.33 का सुरक्षा मार्जिन बनाए रखना होगा और किसी भी कमी को तुरंत पूरा करना होगा।
इसके अलावा, नागरिक परमाणु दायित्व की अधिकतम सीमा की समय-समय पर समीक्षा का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए एक विशेषज्ञ समूह हर पांच वर्ष में इन सीमाओं की जांच करेगा। इससे दायित्व सीमा को तकनीकी, आर्थिक और नियामकीय बदलावों के अनुरूप रखने की कोशिश की जाएगी।
तकनीक, विदेशी रिएक्टर और नए नागरिक उपयोग
विदेशी डिजाइन वाले रिएक्टरों के लिए मसौदा नियमों में यह शर्त रखी गई है कि संबंधित तकनीक का प्रमाणन उस देश के नियामक निकाय से होना चाहिए, जहां से वह तकनीक आई है। साथ ही, वह रिएक्टर तकनीक भारत में उपयोग से पहले उस देश या किसी अन्य विदेशी देश में पहले से चालू होनी चाहिए।
मसौदा परमाणु तकनीक के नागरिक उपयोगों का दायरा भी बढ़ाता है। इसमें कैप्टिव पावर, हाइड्रोजन उत्पादन, प्रोसेस हीट और मेडिकल आइसोटोप उत्पादन जैसे उपयोग शामिल किए गए हैं। इससे परमाणु ऊर्जा को केवल बिजली उत्पादन तक सीमित न रखकर औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्रों में भी उपयोगी बनाने की दिशा दिखाई देती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- परमाणु ऊर्जा विभाग भारत में परमाणु ऊर्जा नीति और प्रशासन का प्रमुख नोडल निकाय है।
- नो-फॉल्ट लायबिलिटी का अर्थ है कि मुआवजे के लिए लापरवाही साबित करना जरूरी नहीं होता।
- स्पेंट फ्यूल वह परमाणु ईंधन है जो रिएक्टर में उपयोग के बाद विकिरणित हो चुका होता है।
- मेडिकल आइसोटोप का उपयोग निदान और उपचार, दोनों में परमाणु चिकित्सा के तहत किया जाता है।
कुल मिलाकर SHANTI नियम 2026 भारत के परमाणु दायित्व और नियमन ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इनमें सुरक्षा, मुआवजा, तकनीकी प्रमाणन और नए नागरिक उपयोगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।