एनटीपीसी सिम्हाद्री में आयरन-एयर बैटरी का पायलट, लंबी अवधि ऊर्जा भंडारण को नई दिशा

एनटीपीसी सिम्हाद्री में आयरन-एयर बैटरी का पायलट, लंबी अवधि ऊर्जा भंडारण को नई दिशा

आंध्र प्रदेश स्थित एनटीपीसी के सिम्हाद्री ताप विद्युत स्टेशन पर स्वदेशी आयरन-एयर बैटरी सिस्टम का यूटिलिटी-स्केल पायलट परीक्षण किया जाएगा। यह पहल लंबे समय तक बिजली भंडारण यानी लॉन्ग-ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज (LDES) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना में चेन्नई की डीप-टेक स्टार्टअप Meine Electric और अटल इनक्यूबेशन सेंटर–अन्ना यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

आयरन-एयर बैटरी क्या है

आयरन-एयर बैटरी एक इलेक्ट्रोकेमिकल स्टोरेज सिस्टम है, जिसमें मुख्य रूप से आयरन, हवा और पानी का उपयोग होता है। इसे इस तरह विकसित किया गया है कि यह बिजली को लंबे समय तक संचित कर सके और जरूरत पड़ने पर कई घंटों तक आपूर्ति दे सके। यही वजह है कि इसे पारंपरिक बैटरियों से अलग, दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

यह तकनीक खास तौर पर उन ग्रिड-स्तरीय जरूरतों के लिए उपयोगी है, जहां बिजली की मांग और आपूर्ति में लगातार संतुलन बनाए रखना होता है। सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ यह तकनीक और भी अहम हो जाती है।

सिम्हाद्री पायलट से क्या जांचा जाएगा

एनटीपीसी सिम्हाद्री में होने वाला पायलट परीक्षण वास्तविक उपयोग की परिस्थितियों में बैटरी की तकनीकी क्षमता, संचालन की विश्वसनीयता और उपयोगिता का आकलन करेगा। यह केवल प्रयोगशाला स्तर की जांच नहीं होगी, बल्कि बिजली संयंत्र और ग्रिड से जुड़ी व्यावहारिक परिस्थितियों में सिस्टम के प्रदर्शन को परखा जाएगा।

समझौते के तहत Meine Electric बैटरी सिस्टम के विकास, सिस्टम इंटीग्रेशन और प्रदर्शन की निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी। कंपनी की Fast Charge Long Discharge (FCLD) प्रणाली में छह घंटे का चार्जिंग चक्र और 18 घंटे का डिस्चार्जिंग चक्र शामिल है। यह व्यवस्था उन जगहों के लिए उपयुक्त मानी जा रही है, जहां लंबे समय तक बिजली उपलब्ध कराना जरूरी होता है।

ऊर्जा भंडारण में इसका महत्व

लॉन्ग-ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज तकनीकें बिजली व्यवस्था में लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये तकनीकें पीक लोड मैनेजमेंट, 24×7 बिजली आपूर्ति और ग्रिड स्थिरता में मदद कर सकती हैं। जब नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता है, तब ऐसी बैटरियां अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखकर बाद में उपयोग में लाने का अवसर देती हैं।

इस बैटरी तकनीक की क्षमता-धारण और इलेक्ट्रोकेमिकल स्थिरता की स्वतंत्र जांच Customized Energy Solutions ने की है, जो India Energy Storage Alliance की मूल कंपनी है। उद्योग जगत में Meine Electric को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इस तरह की तकनीक शुरू करने वाली पहली और वैश्विक स्तर पर तीसरी कंपनी के रूप में उल्लेखित किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनटीपीसी का पूरा नाम National Thermal Power Corporation है।
  • एनटीपीसी भारत की सबसे बड़ी पावर यूटिलिटी मानी जाती है, जब बात स्थापित क्षमता की होती है।
  • Long-Duration Energy Storage (LDES) उन प्रणालियों को कहा जाता है, जो कई घंटों तक बिजली छोड़ सकती हैं।
  • आयरन पृथ्वी की पपड़ी में पाए जाने वाले सबसे प्रचुर धातुओं में से एक है और औद्योगिक उपयोग में व्यापक रूप से काम आता है।

सिम्हाद्री में होने वाला यह पायलट भारत में ऊर्जा भंडारण तकनीकों के व्यावहारिक परीक्षण की दिशा में एक अहम कदम है। यदि यह प्रणाली अपेक्षित प्रदर्शन देती है, तो भविष्य में ग्रिड-स्तरीय भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

Originally written on August 17, 2026 and last modified on August 17, 2026.

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