यूएई को ब्रह्मोस और आकाशतीर प्रणाली की संभावित बिक्री पर भारत से चर्चा
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच भारतीय रक्षा प्रणालियों के संभावित निर्यात को लेकर प्रारंभिक स्तर की बातचीत चल रही है। इस चर्चा में विशेष रूप से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाशतीर वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली शामिल हैं। यदि यह सौदा सफल होता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की विशेषताएं
ब्रह्मोस विश्व की प्रमुख सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त सहयोग से विकसित की गई है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्यधिक गति है, जिसके कारण इसे दुनिया की सबसे तेज परिचालन क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। ब्रह्मोस को भूमि, समुद्र और वायु प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी घोषित अधिकतम मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर रखा गया है, जो इस संयुक्त परियोजना की प्रतीकात्मक पहचान है।
आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली क्या है?
आकाशतीर एक अत्याधुनिक, पूर्णतः स्वचालित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित वायु रक्षा नियंत्रण एवं रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसका विकास भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), डीआरडीओ और भारतीय सेना के सहयोग से किया गया है। यह प्रणाली विभिन्न स्रोतों से प्राप्त वायु संबंधी सूचनाओं को एकीकृत कर एक समग्र वायु चित्र (इंटीग्रेटेड एयर पिक्चर) तैयार करती है। इसके माध्यम से वायु रक्षा संसाधनों का बेहतर समन्वय, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया संभव होती है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में ऐसी प्रणालियां वायु सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
निर्यात प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियां
ब्रह्मोस एक भारत-रूस संयुक्त परियोजना है, इसलिए इसके किसी भी निर्यात के लिए रूस की मंजूरी आवश्यक होती है। यही कारण है कि ब्रह्मोस की बिक्री केवल दोनों साझेदार देशों की सहमति से ही संभव है। दूसरी ओर, आकाशतीर पूरी तरह भारतीय तकनीक से विकसित प्रणाली है। इसलिए इसके निर्यात के लिए किसी विदेशी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। यह भारत को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। यदि यूएई को ब्रह्मोस की बिक्री पूरी हो जाती है, तो वह इस मिसाइल प्रणाली का संचालन करने वाला चौथा विदेशी देश बन जाएगा।
रणनीतिक महत्व और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य
यूएई हाल के वर्षों में अपनी रक्षा खरीद नीति में विविधता लाने पर जोर दे रहा है। इसी रणनीति के तहत वह भारतीय रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा रहा है। भारत भी रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और निर्यात बढ़ाने की नीति के तहत मित्र देशों को उन्नत सैन्य प्रणालियां उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह संभावित सौदा पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत कर सकता है। साथ ही, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में भी इसका महत्व माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसकी घोषित अधिकतम मारक क्षमता 290 किलोमीटर है।
- ब्रह्मोस को भूमि, समुद्र और वायु तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।
- आकाशतीर एक एआई-सक्षम वायु रक्षा नियंत्रण एवं रिपोर्टिंग प्रणाली है।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी है।
भारत और यूएई के बीच ब्रह्मोस तथा आकाशतीर जैसे उन्नत रक्षा उपकरणों को लेकर चल रही बातचीत भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात और तकनीकी क्षमता का संकेत है। यदि यह समझौता साकार होता है, तो इससे दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलेगी और वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।