कर्नाटक का एआई-आधारित डिजिटल फसल सर्वे कृषि डेटा में नई छलांग

कर्नाटक का एआई-आधारित डिजिटल फसल सर्वे कृषि डेटा में नई छलांग

कर्नाटक ने 6 अगस्त 2026 को कॉम्पोजिट डिजिटल क्रॉप सर्वे (CDCS) की शुरुआत कर कृषि डेटा संग्रह और खेत-स्तरीय मैपिंग को अधिक सटीक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह पहल राज्य के मौजूदा डिजिटल क्रॉप सर्वे ढांचे को आगे बढ़ाती है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिंथेटिक अपर्चर रडार, उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे, जीआईएस डेटा और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जाएगा।

क्या है कॉम्पोजिट डिजिटल क्रॉप सर्वे

CDCS को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है, जो कर्नाटक के पांच चयनित होबली क्षेत्रों में लागू होगा। होबली राज्य की राजस्व व्यवस्था में तालुक से नीचे की एक प्रशासनिक इकाई होती है। इस परियोजना की खासियत यह है कि यह केवल फसल की जानकारी इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेतों की स्थिति, फसल पैटर्न और भौगोलिक विवरण को एक साथ जोड़कर विश्लेषण करने की कोशिश करती है।

राज्य का डिजिटल क्रॉप सर्वे पहले से ही 2018 से जीआईएस-आधारित मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए प्लॉट-स्तरीय डेटा जुटा रहा है। नया मॉडल इसी आधार पर रिमोट सेंसिंग और एआई टूल्स को जोड़कर अधिक व्यापक और तकनीक-सक्षम व्यवस्था तैयार करता है।

किसानों और प्रशासन के लिए क्यों अहम है यह पहल

कृषि क्षेत्र में सही डेटा नीति-निर्माण, फसल आकलन, नुकसान के अनुमान और योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन के लिए बेहद जरूरी होता है। पारंपरिक सर्वेक्षणों में समय और संसाधन अधिक लगते हैं, जबकि उपग्रह चित्र, ड्रोन और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें बड़े क्षेत्र का तेज और तुलनात्मक रूप से अधिक सटीक आकलन संभव बनाती हैं।

सिंथेटिक अपर्चर रडार की मदद से बादलों के बीच या रात में भी सतह से जुड़ा डेटा लिया जा सकता है। वहीं जीआईएस तकनीक स्थानिक डेटा को संग्रहित, विश्लेषित और प्रदर्शित करने में उपयोगी होती है। इसी कारण यह परियोजना मौसम, भू-आकृति और फसल स्थिति जैसे कई स्तरों पर उपयोगी जानकारी दे सकती है।

विभागों की भागीदारी और आगे की योजना

इस पहल में कर्नाटक के राजस्व, कृषि, बागवानी, रेशम, मत्स्य और आईटी-बीटी विभाग शामिल हैं। 6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित सीएएएस ऑफिसर्स रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में इस परियोजना से जुड़े हितधारकों की कार्यशाला भी आयोजित की गई।

राज्य कृषि विभाग एक अलग एआई-आधारित सलाहकारी मंच भी विकसित कर रहा है, जिसका लाभ एक करोड़ से अधिक पंजीकृत किसानों तक पहुंचाने की योजना है। इस मंच से किसानों को फसल प्रबंधन, मौसम-आधारित सलाह और निर्णय सहायता जैसी सेवाएं मिल सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सिंथेटिक अपर्चर रडार एक रिमोट सेंसिंग तकनीक है, जो बादलों के पार और रात में भी डेटा जुटा सकती है।
  • जीआईएस यानी Geographic Information System स्थानिक डेटा के संग्रह, विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण में काम आता है।
  • कर्नाटक की राजस्व व्यवस्था में होबली, तालुक से नीचे की प्रशासनिक इकाई होती है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीनों को सीखने, पैटर्न पहचानने और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं से जोड़ती है, जबकि मशीन लर्निंग इसका एक उपक्षेत्र है।

कुल मिलाकर, कर्नाटक का यह कदम कृषि प्रशासन में तकनीक के बढ़ते उपयोग का संकेत है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो यह राज्य में फसल सर्वेक्षण और कृषि डेटा प्रबंधन के लिए एक अधिक आधुनिक मॉडल बन सकता है।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

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