वायनाड में लगेगा एक्स-बैंड डॉप्लर रडार, बारिश और भूस्खलन निगरानी होगी मजबूत

वायनाड में लगेगा एक्स-बैंड डॉप्लर रडार, बारिश और भूस्खलन निगरानी होगी मजबूत

केरल के वायनाड जिले में मौसम निगरानी को नई मजबूती मिलने जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) 2026 के अंत तक पल्पल्ली में एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार चालू करेगा, जिससे 100 किलोमीटर के दायरे में उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम अवलोकन संभव होगा। पश्चिमी घाट के संवेदनशील भू-भाग में यह रडार भारी बारिश, बादल फटने जैसी घटनाओं और संभावित भूस्खलन की बेहतर निगरानी में मदद करेगा।

वायनाड जैसे क्षेत्र में क्यों जरूरी है यह रडार

वायनाड पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जहां ढलानें तीखी हैं और मानसूनी बारिश अक्सर बहुत तेज होती है। यही कारण है कि यह इलाका भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां कई गंभीर घटनाएं हुई हैं। जुलाई 2024 में मेप्पाडी भूस्खलन में 298 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 7 जुलाई 2026 को कोझिकोड–वायनाड ट्विन टनल परियोजना स्थल के पास हुए भूस्खलन में सात लोगों की जान गई।

ऐसे हालात में स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम डेटा बेहद अहम हो जाता है, ताकि भारी वर्षा की तीव्रता और उसके संभावित असर का समय रहते आकलन किया जा सके।

एक्स-बैंड डॉप्लर रडार क्या करता है

डॉप्लर वेदर रडार एक रिमोट-सेंसिंग उपकरण है, जो माइक्रोवेव संकेतों की मदद से वर्षा, हवा की गति और तूफानी संरचना का पता लगाता है। यह बारिश के बादलों की गति और तीव्रता को समझने में भी उपयोगी होता है।

एक्स-बैंड रडार, एस-बैंड और सी-बैंड रडार की तुलना में अधिक आवृत्ति पर काम करता है। इसी वजह से यह कम दूरी पर अधिक सटीक और उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी के लिए उपयुक्त माना जाता है। खासकर बारिश की तीव्रता, स्थानीय बादल-समूह और अचानक होने वाली भारी वर्षा की पहचान में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

परियोजना का प्रशासनिक ढांचा और संचालन

रडार स्थापना के लिए जमीन पल्पल्ली स्थित पझस्सी राजा कॉलेज ने उपलब्ध कराई है। परियोजना में केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी समन्वय और सहयोग दिया है। IMD तिरुवनंतपुरम की निदेशक नीथा गोपाल के अनुसार, इस रडार का संचालन, रखरखाव और निगरानी IMD के प्रशिक्षित तकनीकी और मौसम विज्ञान कर्मियों द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत की जाएगी।

यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का व्यवहार तेजी से बदलता है और स्थानीय स्तर पर त्वरित चेतावनी प्रणाली जान-माल की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • डॉप्लर रडार वर्षा कणों की गति को डॉप्लर प्रभाव की मदद से मापते हैं।
  • एक्स-बैंड रडार कम दूरी पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम निगरानी के लिए उपयोगी होते हैं।
  • पश्चिमी घाट भारत के प्रमुख भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में गिने जाते हैं।

वायनाड में यह रडार न सिर्फ मौसम पूर्वानुमान को अधिक स्थानीय और सटीक बनाएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी तेज निर्णय लेने में मदद देगा। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों के लिए ऐसी तकनीकें अब मौसम सुरक्षा का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

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