भारतीय वायुसेना को सितंबर 2026 में मिलेगा पहला स्वदेश निर्मित C295 परिवहन विमान

भारतीय वायुसेना को सितंबर 2026 में मिलेगा पहला स्वदेश निर्मित C295 परिवहन विमान

भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारतीय वायुसेना (IAF) को 22-23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में पहला स्वदेश निर्मित C295 परिवहन विमान मिलने जा रहा है। यह विमान रक्षा मंत्रालय और एयरबस के बीच सितंबर 2021 में हुए 56 विमानों के खरीद समझौते का हिस्सा है। इस परियोजना को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

क्या है C295 परिवहन विमान?

C295 एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान है, जिसका उपयोग सामरिक हवाई परिवहन, सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और विभिन्न सैन्य अभियानों में किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका रियर कार्गो रैंप है, जिसके माध्यम से भारी उपकरणों और सैन्य सामग्री की लोडिंग एवं अनलोडिंग आसानी से की जा सकती है। यह विमान छोटे और अर्ध-तैयार रनवे से भी संचालन करने में सक्षम है, जिससे दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता काफी बढ़ जाती है।

भारत में हो रहा है निर्माण

C295 कार्यक्रम का क्रियान्वयन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एयरबस के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के वडोदरा में एक अत्याधुनिक फाइनल असेंबली लाइन (FAL) स्थापित की गई है। 56 विमानों के इस अनुबंध के तहत पहले 16 विमान स्पेन के सेविले स्थित एयरबस संयंत्र से सीधे उड़ान योग्य स्थिति (Fly-away Condition) में भारत को दिए जा रहे हैं। शेष 40 विमान भारत में ही निर्मित और असेंबल किए जाएंगे।

अव्रो विमान बेड़े का लेगा स्थान

स्वदेश निर्मित C295 विमान भारतीय वायुसेना के पुराने अव्रो HS-748 परिवहन विमानों की जगह लेंगे। अव्रो विमान 1960 के दशक की शुरुआत से भारतीय वायुसेना की सेवा में रहे हैं। इन विमानों का निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा लाइसेंस के तहत किया गया था। नई पीढ़ी के C295 विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता, परिचालन दक्षता और मिशन तैयारियों में उल्लेखनीय सुधार होगा।

उत्पादन और डिलीवरी कार्यक्रम

वडोदरा स्थित फाइनल असेंबली लाइन से निर्मित पहले भारतीय C295 विमान ने जून 2026 में अपनी पहली परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की थी। इसके बाद सितंबर 2026 में इसे भारतीय वायुसेना को सौंपा जाएगा। अनुबंध के तहत शेष 39 स्वदेश निर्मित विमानों की डिलीवरी अगस्त 2031 तक पूरी किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ स्थानीय सामग्री (Local Content) का स्तर 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा

C295 परियोजना भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश में एयरोस्पेस निर्माण, कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • C295 एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान है।
  • इसका निर्माण एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा किया जाता है।
  • रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2021 में 56 C295 विमानों की खरीद के लिए अनुबंध किया था।
  • C295 की फाइनल असेंबली लाइन गुजरात के वडोदरा में स्थापित की गई है।
  • सभी डिलीवरी पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना C295 विमानों की दुनिया की सबसे बड़ी संचालक (Operator) बन सकती है।
  • यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों से जुड़ी हुई है।

भारतीय वायुसेना को पहला स्वदेश निर्मित C295 विमान मिलना देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना न केवल आधुनिक सैन्य परिवहन क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगी।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

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