अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। 22 जून 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पहले से उपयोग किए जा रहे एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर प्रणालियों के लिए एक सैन्य सहायता पैकेज को मंजूरी दी। इस पैकेज का कुल अनुमानित मूल्य 482.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह सहायता किसी नए हथियार की खरीद से संबंधित नहीं है, बल्कि मौजूदा रक्षा प्रणालियों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदान की जा रही है।
एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए सहायता पैकेज
एएच-64ई अपाचे दुनिया के सबसे उन्नत अटैक हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। बोइंग द्वारा विकसित यह ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर एंटी-आर्मर अभियान, टोही मिशन और क्लोज एयर सपोर्ट जैसी भूमिकाओं में उपयोग किया जाता है। भारत की अपाचे हेलीकॉप्टर क्षमता को बनाए रखने के लिए लगभग 198.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज को मंजूरी दी गई है। इस पैकेज में स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत सेवाएं, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, फील्ड सर्विस प्रतिनिधियों की सेवाएं तथा डिपो-स्तरीय रखरखाव क्षमता शामिल है। इससे भारतीय वायुसेना और थलसेना की अपाचे इकाइयों की परिचालन दक्षता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर को मिलेगा तकनीकी समर्थन
एम777ए2 एक 155 मिमी की टो की जाने वाली होवित्जर तोप है, जिसका उपयोग लंबी दूरी की तोपखाना सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका हल्का वजन है, जो मुख्य रूप से टाइटेनियम निर्माण के कारण संभव हो पाया है। भारतीय सेना ने इस प्रणाली को विशेष रूप से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात किया है। एम777ए2 के लिए लगभग 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज में स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत सेवाएं, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और डिपो-स्तरीय समर्थन शामिल हैं। इससे भारतीय सेना की तोपखाना क्षमता को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री प्रक्रिया
अमेरिका में रक्षा उपकरणों और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण के लिए विदेशी सैन्य बिक्री प्रणाली का उपयोग किया जाता है। मई 2026 में अमेरिकी विदेश विभाग ने इन संभावित बिक्री प्रस्तावों की जानकारी कांग्रेस को दी थी। इसके बाद 17 जून 2026 को रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने संघीय रजिस्टर में औपचारिक अधिसूचना जारी की। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि मित्र देशों को रक्षा सामग्री और सेवाओं का हस्तांतरण अमेरिकी सरकार की स्वीकृत और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से किया जाए। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा देता है।
रणनीतिक महत्व और भारत-अमेरिका संबंध
यह सहायता पैकेज भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। चूंकि यह पैकेज नई हथियार प्रणालियों की बिक्री के बजाय मौजूदा प्लेटफॉर्मों की परिचालन क्षमता बनाए रखने पर केंद्रित है, इसलिए इसका मुख्य उद्देश्य भारत की रक्षा तैयारी को मजबूत करना है। इस कदम से भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता, रखरखाव व्यवस्था और दीर्घकालिक परिचालन तत्परता को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी अमेरिका की वह संस्था है जो विदेशी सैन्य बिक्री अधिसूचनाओं और रक्षा सहयोग प्रक्रियाओं का प्रबंधन करती है।
- एएच-64ई अपाचे दुनिया के सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले अटैक हेलीकॉप्टर संस्करणों में से एक है।
- एम777 होवित्जर अपनी हल्की टाइटेनियम संरचना और 155 मिमी कैलिबर के लिए प्रसिद्ध है।
- एम777 सहायता कार्यक्रम का प्रमुख ठेकेदार बीएई सिस्टम्स है, जबकि अपाचे पैकेज के प्रमुख ठेकेदार बोइंग और लॉकहीड मार्टिन हैं।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे रहा है। अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 होवित्जर प्रणालियों के लिए स्वीकृत यह सहायता पैकेज भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगा।