मोल्दोवा यात्रा से भारत की कूटनीति को नई गति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मोल्दोवा यात्रा ने भारत और इस पूर्वी यूरोपीय देश के संबंधों को नई राजनीतिक और आर्थिक ऊर्जा दी है। 20 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति माया सांडू के निमंत्रण पर हुई यह यात्रा इसलिए भी अहम रही क्योंकि 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली मोल्दोवा राज्य यात्रा थी। चिसीनाउ में हुई उच्चस्तरीय बातचीत में दोनों देशों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत-मोल्दोवा संबंधों में नया अध्याय
भारत और मोल्दोवा के संबंध 1992 में सोवियत संघ के विघटन के बाद शुरू हुए थे। मोल्दोवा पूर्वी यूरोप का एक स्थलरुद्ध देश है और इसकी राजधानी चिसीनाउ है। अब तक दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग की सीमित लेकिन निरंतर रूपरेखा रही है। राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा इस रिश्ते को अधिक संस्थागत और व्यावहारिक दिशा देने वाली मानी जा रही है।राष्ट्रपति भवन में हुई वार्ता में दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में छोटे और मध्यम आकार के देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी की भूमिका और बढ़ जाती है। इसी संदर्भ में व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई।
3T पर केंद्रित रही बातचीत
इस यात्रा का प्रमुख फोकस “3T” यानी Trade, Technology and Talent रहा। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर कूटनीति, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर विचार किया। भारत ने नवाचार और निवेश के जरिए कारोबारी जुड़ाव बढ़ाने का समर्थन भी जताया।यह पहल भारत की उस व्यापक विदेश नीति से मेल खाती है, जिसमें तकनीक, कौशल और बाजार पहुंच को कूटनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मोल्दोवा जैसे देश के साथ सहयोग भारत के लिए यूरोप में नए आर्थिक संपर्कों का रास्ता खोल सकता है।
संसदीय और शैक्षिक सहयोग पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात की और मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी बातचीत की। इसके साथ ही दोनों देशों के व्यवसायिक प्रतिनिधियों को जोड़ने के लिए भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम का आयोजन किया गया।यात्रा के दौरान भारत ने मोल्दोवा के लिए भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के प्रशिक्षण स्लॉट दोगुने करने की घोषणा की। यह कदम क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। साथ ही, मोल्दोवा की पशु चिकित्सा डिग्रियों को भारत में मान्यता देने का निर्णय भी लिया गया, जिससे पेशेवर शिक्षा और योग्यता समकक्षता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
प्रतीकात्मक संदेश और सांस्कृतिक जुड़ाव
राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति माया सांडू को महात्मा गांधी की एक प्रतिमा भेंट की और चिसीनाउ स्थित स्टीफन सेल मारे सि स्फांट स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। ऐसे प्रतीकात्मक कदम केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि वे आपसी सम्मान, ऐतिहासिक स्मृति और सांस्कृतिक संवाद को भी मजबूत करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मोल्दोवा पूर्वी यूरोप का स्थलरुद्ध देश है और इसकी राजधानी चिसीनाउ है।
- भारत और मोल्दोवा के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे।
- Indian Technical and Economic Cooperation (ITEC) भारत सरकार का क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसके तहत साझेदार देशों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
- कूटनीतिक उपहारों और स्मारक भेंटों में महात्मा गांधी की प्रतिमा या बस्ट अक्सर भारत की ओर से दी जाती है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुर्मू की मोल्दोवा यात्रा ने भारत की यूरोप नीति में एक नए, व्यावहारिक और अवसर-आधारित अध्याय की शुरुआत की है। व्यापार, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास पर बनी सहमति आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को अधिक ठोस आधार दे सकती है।