ओकिनोटोरिशिमा के पास चीन की नौसैनिक ड्रिल से बढ़ा समुद्री तनाव

ओकिनोटोरिशिमा के पास चीन की नौसैनिक ड्रिल से बढ़ा समुद्री तनाव

जापान द्वारा अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का हिस्सा बताए जाने वाले समुद्री इलाके में चीन की लाइव-फायर नौसैनिक ड्रिल ने पूर्वी एशिया में समुद्री तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। यह अभ्यास 20 जुलाई 2026 को ओकिनोटोरिशिमा के पास किया गया, जिसे जापान अपना सबसे दक्षिणी द्वीप मानता है। जापान के अनुसार यह गतिविधि उसके दावे वाले EEZ के भीतर हुई, जबकि चीन लंबे समय से ओकिनोटोरिशिमा की समुद्री हैसियत पर सवाल उठाता रहा है।यह घटना सिर्फ एक सैन्य अभ्यास भर नहीं है, बल्कि समुद्री सीमाओं, अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा भी है। ऐसे समय में जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां पहले से ही बढ़ी हुई हैं, इस ड्रिल ने जापान और चीन के बीच पुरानी कानूनी बहस को फिर सामने ला दिया है।

ड्रिल कहां और कैसे हुई

रिपोर्ट के मुताबिक यह लाइव-फायर अभ्यास ओकिनोटोरिशिमा से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में हुआ। इसमें चीन के Luyang III-class मिसाइल विध्वंसक ने गोला-बारूद दागा। उसी क्षेत्र में एक रूसी फ्रिगेट की मौजूदगी भी दर्ज की गई। जापान के रक्षा मंत्रालय ने इसे अपने दावे वाले EEZ में किसी विदेशी नौसेना की लाइव-फायर गतिविधि की पहली सार्वजनिक रूप से घोषित पहचान बताया है।जापान ने 21 जुलाई 2026 को आधिकारिक चैनलों के जरिए कूटनीतिक विरोध भी दर्ज कराया। यह प्रतिक्रिया बताती है कि समुद्री अभ्यासों को लेकर टकराव अब केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी तेज हो रहा है।

EEZ को लेकर विवाद क्यों अहम है

विशेष आर्थिक क्षेत्र, यानी EEZ, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि UNCLOS के तहत परिभाषित समुद्री क्षेत्र है। यह तटरेखा के आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैल सकता है। इस क्षेत्र में तटीय देश को प्राकृतिक संसाधनों—जैसे समुद्री जीव, समुद्र तल और उप-समुद्र तल—पर विशेष अधिकार मिलते हैं। हालांकि अन्य देशों को यहां नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता बनी रहती है।यही कारण है कि EEZ में सैन्य अभ्यासों को लेकर अक्सर कानूनी और कूटनीतिक विवाद खड़े होते हैं। कई देशों की व्याख्या अलग-अलग होती है कि किसी EEZ में विदेशी नौसेना कितनी गतिविधि कर सकती है।

ओकिनोटोरिशिमा पर मतभेद की जड़

ओकिनोटोरिशिमा एक छोटा प्रवाल एटोल है, जो फिलीपीन सागर में स्थित है। जापान इसे अपना दक्षिणी सबसे दूरस्थ क्षेत्र मानता है और दावा करता है कि यह EEZ उत्पन्न कर सकता है। दूसरी ओर चीन का तर्क है कि यह भू-भाग इतना छोटा है और उच्च ज्वार के समय लगभग डूबा रहता है कि इसे पूर्ण द्वीप मानकर EEZ का अधिकार नहीं दिया जा सकता।इस बहस का आधार UNCLOS के अनुच्छेद 121 से जुड़ा है, जिसमें द्वीप, चट्टान और निम्न-ज्वार क्षेत्र जैसी समुद्री संरचनाओं के अलग-अलग कानूनी दर्जे बताए गए हैं। किसी भू-भाग को किस श्रेणी में रखा जाए, इससे उसके समुद्री अधिकार तय होते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • UNCLOS के तहत EEZ तटरेखा से 200 समुद्री मील तक हो सकता है।
  • अनुच्छेद 121 द्वीपों और उनकी समुद्री अधिकार-सीमा से संबंधित है।
  • जापान ओकिनोटोरिशिमा को अपना सबसे दक्षिणी क्षेत्र मानता है।
  • Luyang III-class चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी का आधुनिक मिसाइल विध्वंसक है।

यह मामला दिखाता है कि समुद्री सीमाओं का विवाद अब केवल नक्शों तक सीमित नहीं है, बल्कि नौसैनिक उपस्थिति, संसाधन अधिकार और क्षेत्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ चुका है। जापान-चीन तनाव के इस नए दौर में ओकिनोटोरिशिमा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून की बहस का केंद्र बन गया है।

Originally written on July 21, 2026 and last modified on July 21, 2026.

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