ब्रिटेन में पहली बार कैबिनेट स्तर पर एआई मंत्रालय, कनिष्क नारायण को जिम्मेदारी
ब्रिटेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनी शीर्ष नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कनिष्क नारायण को देश का पहला एआई मंत्री नियुक्त किया है। यह पद सीधे प्रधानमंत्री की कैबिनेट से जुड़ा होगा, जिससे साफ संकेत मिलता है कि ब्रिटिश सरकार अब एआई, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल विनियमन को केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि रणनीतिक नीति क्षेत्र के रूप में देख रही है।
कौन हैं कनिष्क नारायण
कनिष्क नारायण भारतीय मूल के ब्रिटिश राजनेता हैं। उनका जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था और वे 12 वर्ष की उम्र में कार्डिफ़, वेल्स चले गए थे। वे 2024 से हाउस ऑफ कॉमन्स में वेल्स के वैले ऑफ ग्लैमरगन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे पहले वे सितंबर 2025 से जुलाई 2026 तक एआई और ऑनलाइन सेफ्टी के लिए संसदीय उप-मंत्री रह चुके हैं।लेबर पार्टी से जुड़े नारायण की नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह ब्रिटेन की तकनीकी नीति में भारतीय मूल के नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
एआई को कैबिनेट स्तर पर क्यों लाया गया
ब्रिटेन ने 2026 में अपने मंत्रिमंडलीय ढांचे में एआई मंत्री का पद बनाया। इस कदम का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नियमों, नवाचार, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को एक समन्वित नीति के तहत आगे बढ़ाना है।कैबिनेट स्तर पर यह जिम्मेदारी मिलने से एआई से जुड़े फैसलों को अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व मिलेगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि ब्रिटेन वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
व्हाइटहॉल में प्रशासनिक बदलाव
इस नियुक्ति के साथ ब्रिटेन के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किए गए हैं। विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (DSIT) को कैबिनेट फेरबदल के दौरान समाप्त कर दिया गया और उसके एआई तथा ऑनलाइन हानियों से जुड़े कार्यों को व्यापार एवं वाणिज्य विभाग के विस्तारित ढांचे और संस्कृति विभाग में समाहित किया गया।व्हाइटहॉल लंदन में ब्रिटिश सरकार का प्रशासनिक केंद्र है, जहां से प्रमुख नीतिगत और सरकारी निर्णय संचालित होते हैं। ऐसे में विभागीय पुनर्गठन का अर्थ है कि एआई नीति अब अलग-थलग तकनीकी विषय न रहकर व्यापक आर्थिक और सामाजिक नीति का हिस्सा बन गई है।
ब्रिटेन की एआई नीति का व्यापक संदर्भ
ब्रिटेन लंबे समय से खुद को एक वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह वेंचर कैपिटल, तकनीकी कंपनियों और इंजीनियरिंग प्रतिभा पर भरोसा कर रहा है। लंदन और कार्डिफ़ जैसे शहर तकनीक, डिजिटल उद्योग और नीति-निर्माण से जुड़े प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।गूगल डीपमाइंड जैसी ब्रिटेन-आधारित कंपनियां भी देश की एआई पहचान को मजबूत करती हैं। ऐसे में कनिष्क नारायण की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ब्रिटेन की तकनीकी महत्वाकांक्षा का भी प्रतीक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसे कंप्यूटर सिस्टम को कहते हैं जो पैटर्न पहचानने, भाषा संसाधन और निर्णय-सहायता जैसे मानव-सदृश कार्य कर सकते हैं।
- हाउस ऑफ कॉमन्स ब्रिटेन की संसद का निर्वाचित निचला सदन है।
- कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री की वरिष्ठ निर्णय-निर्माण टीम का हिस्सा होते हैं।
- व्हाइटहॉल लंदन में ब्रिटिश सरकार का प्रशासनिक केंद्र है।
कुल मिलाकर, कनिष्क नारायण की नियुक्ति ब्रिटेन में एआई नीति को नई राजनीतिक प्राथमिकता देने का संकेत है। यह कदम दिखाता है कि आने वाले समय में तकनीक, सुरक्षा और डिजिटल नियमन पर सरकारों की भूमिका और अधिक निर्णायक होने वाली है।