मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ की नई योजना
केंद्र सरकार ने देश में मोबाइल फोन निर्माण को और मजबूत करने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को अधिसूचित कर दिया है। यह योजना 21 अगस्त 2026 को जारी की गई और इसका कार्यकाल वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक रहेगा। इसके साथ ही मोबाइल फोन उत्पादन के लिए पहले लागू बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़ी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव व्यवस्था की जगह अब यह नई रूपरेखा लागू होगी।
योजना का ढांचा और उद्देश्य
यह योजना केंद्रीय क्षेत्र की प्रोत्साहन योजना है, जिसका मकसद भारत में मोबाइल फोन उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है। इसे 15 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य केवल असेंबली बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात क्षमता को भी मजबूत करना है।
दो लक्षित वर्गों के लिए अलग प्रोत्साहन
योजना को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। पहला वर्ग वैश्विक और बड़े पैमाने के मोबाइल निर्माताओं के लिए है, जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर पूरा करने पर 2.25% से 5% तक का आधार प्रोत्साहन मिलेगा। दूसरा वर्ग घरेलू ब्रांडों के लिए है, जिसमें 1,000 करोड़ रुपये के अपेक्षाकृत कम टर्नओवर मानक के साथ 5% का स्थिर प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी रखा गया है।
स्थानीय मूल्य संवर्धन और निर्यात पर फोकस
अधिसूचना में स्थानीय खरीद को भी विशेष महत्व दिया गया है। यदि कोई कंपनी एक वित्त वर्ष में निर्मित कुल मोबाइल यूनिट्स के कम से कम 25% के लिए प्रमुख घटकों की घरेलू सोर्सिंग करती है, तो उसे 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार ने यह भी अनुमान लगाया है कि इस योजना से कुल मोबाइल उत्पादन 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। साथ ही, निर्यात बढ़ने और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मोबाइल फोन निर्माण के लिए यह योजना भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव व्यवस्था का नया संस्करण है।
- योजना का कुल परिव्यय 62,500 करोड़ रुपये है और यह पांच वित्त वर्षों तक चलेगी।
- पहला लक्षित वर्ग बड़े वैश्विक निर्माताओं के लिए है, जबकि दूसरा वर्ग घरेलू ब्रांडों और डिजाइन-आरएंडडी पर केंद्रित है।
- घरेलू घटकों की खरीद बढ़ाने पर 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
यह कदम भारत में मोबाइल फोन विनिर्माण को केवल असेंबली स्तर से आगे बढ़ाकर अधिक मूल्य संवर्धन, तकनीकी क्षमता और निर्यात-उन्मुख उत्पादन की दिशा में ले जाने का संकेत देता है।