देश में एलपीजी ढांचे को मिलेगी नई रफ्तार, 1,800 किमी पाइपलाइन को मंजूरी

देश में एलपीजी ढांचे को मिलेगी नई रफ्तार, 1,800 किमी पाइपलाइन को मंजूरी

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने 21 अगस्त 2026 को 1,800 किलोमीटर लंबी नई एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को अधिकृत किया। करीब 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाली इस परियोजना की जिम्मेदारी GAIL (India) Limited को दी गई है। यह कदम देश में थोक एलपीजी परिवहन को सड़क मार्ग से पाइपलाइन आधारित व्यवस्था की ओर और मजबूत करेगा।

कहां से कहां तक पहुंचेगी नई पाइपलाइन

यह नेटवर्क छह राज्यों—तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा—से होकर गुजरेगा। परियोजना के तहत तीन अलग-अलग पाइपलाइन खंड बनाए जाएंगे: चेरलापल्ली से नागपुर, झांसी से सितारगंज, और शिकरपुर से गोवा व हुबली। इनकी लंबाई क्रमशः 556 किलोमीटर, 611 किलोमीटर और 633 किलोमीटर होगी।

इन तीनों खंडों को मिलाकर एक समर्पित एलपीजी परिवहन ढांचा तैयार होगा, जो मध्य, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्सों को जोड़ेगा। इससे बड़े पैमाने पर एलपीजी की ढुलाई अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी।

पाइपलाइन से क्यों बदल रही है आपूर्ति व्यवस्था

एलपीजी की ढुलाई में पाइपलाइन का उपयोग सड़क टैंकरों पर निर्भरता कम करता है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटती है, सड़क पर भीड़ कम होती है और लंबी दूरी की ढुलाई में दुर्घटना जोखिम भी कम हो सकता है। साथ ही, सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है, इसलिए यह व्यवस्था पर्यावरण की दृष्टि से भी अधिक अनुकूल मानी जाती है।

भारत में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार के लिए ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश में घरेलू रसोई गैस के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग के लिए भी एलपीजी की मांग लगातार बनी रहती है।

PNGRB की भूमिका और ‘कॉमन-केरियर’ व्यवस्था

PNGRB की स्थापना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के तहत की गई थी। यह बोर्ड रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण, विपणन और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस की बिक्री से जुड़े क्षेत्रों को विनियमित करता है।

बोर्ड कॉमन-केरियर और कॉन्ट्रैक्ट-केरियर पाइपलाइनों को भी अधिकृत करता है। कॉमन-केरियर पाइपलाइन एक खुली पहुंच वाली व्यवस्था होती है, जिसमें नियामकीय शर्तों के तहत कई उपयोगकर्ता एक ही ढांचे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी कारण यह मॉडल प्रतिस्पर्धा और दक्षता दोनों को बढ़ावा देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एलपीजी का पूरा नाम Liquefied Petroleum Gas है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस और कुछ औद्योगिक कार्यों में होता है।
  • GAIL (India) Limited पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है।
  • कॉमन-केरियर पाइपलाइनें नियामित शर्तों पर कई उपयोगकर्ताओं को परिवहन सुविधा देती हैं।
  • नई परियोजना के बाद भारत की कॉमन-केरियर एलपीजी पाइपलाइन लंबाई लगभग 7,700 किलोमीटर से बढ़कर करीब 9,500 किलोमीटर हो सकती है।

यह मंजूरी भारत के ऊर्जा अवसंरचना विस्तार की दिशा में एक अहम कदम है। बड़े पैमाने पर एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति, कम लागत और बेहतर सुरक्षा के लिहाज से यह नेटवर्क आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Originally written on August 22, 2026 and last modified on August 22, 2026.

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