चेन्नई की जल सुरक्षा के लिए एडीबी से 230 मिलियन डॉलर का ऋण
भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 21 अगस्त 2026 को चेन्नई क्लाइमेट-रेजिलिएंट वॉटर सिक्योरिटी एंड सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए 230 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना ग्रेटर चेन्नई क्षेत्र में जलापूर्ति और स्वच्छता ढांचे को मजबूत करेगी तथा लगभग 45 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखती है।
परियोजना का दायरा और बुनियादी ढांचा
इस परियोजना के तहत 170 किलोमीटर से अधिक लंबी जलापूर्ति और सीवर पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही चेन्नई में 7 जल पंपिंग स्टेशनों और 38 सीवर पंपिंग स्टेशनों का उन्नयन किया जाएगा। इन कार्यों का उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी के लिए अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और जलवायु-लचीली सेवाएं उपलब्ध कराना है।
क्यों खास है यह मॉडल
यह परियोजना चेन्नई को भारत का पहला ऐसा शहर बनाएगी, जहां जलापूर्ति के लिए क्लोज्ड-लूप रिंग-मेन सिस्टम लागू होगा। यह प्रणाली नेटवर्क में पानी के दबाव को संतुलित रखने में मदद करती है और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाती है। परियोजना में नेटवर्क की डिजिटल निगरानी और सीवर निरीक्षण के लिए यंत्रीकृत उपकरणों का भी उपयोग होगा, जिससे संचालन और रखरखाव अधिक प्रभावी हो सकेगा।
समझौते और नीति से जुड़ाव
ऋण समझौते पर आर्थिक कार्य विभाग के उप सचिव सौरभ सिंह और एडीबी की भारत निवासी मिशन की कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने हस्ताक्षर किए। एडीबी ने इस ऋण को 3 जुलाई 2026 को मंजूरी दी थी। यह परियोजना भारत के शहरी बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों, खासकर अमृत 2.0 और अर्बन चैलेंज फंड, के अनुरूप है। इससे पहले भी एडीबी भारत में कई शहरी परियोजनाओं को समर्थन दे चुका है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई विकास बैंक की स्थापना 1966 में हुई थी और इसका मुख्यालय मनीला, फिलीपींस में है।
- अमृत 2.0 का पूरा नाम अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 है।
- चेन्नई तमिलनाडु की राजधानी और भारत के प्रमुख महानगरों में से एक है।
- क्लोज्ड-लूप रिंग-मेन जल प्रणाली शहरी जल वितरण में दबाव प्रबंधन और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए उपयोग की जाती है।
यह समझौता चेन्नई की जल और सीवर व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बढ़ते शहरी दबाव और जलवायु जोखिमों के बीच ऐसी परियोजनाएं बड़े महानगरों के लिए दीर्घकालिक समाधान का आधार बनती हैं।