मेघालय में बाल कुपोषण में सुधार

मेघालय में बाल कुपोषण में सुधार

मेघालय में बच्चों के पोषण से जुड़ी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग की दर 46.5 प्रतिशत से घटकर 36.8 प्रतिशत हो गई है। यह 9.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट है, जो बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।

स्टंटिंग में गिरावट का महत्व

स्टंटिंग का अर्थ है उम्र के अनुपात में बच्चे की लंबाई कम होना। यह लंबे समय तक पोषण की कमी, बार-बार बीमारी, मातृ स्वास्थ्य की कमजोर स्थिति और देखभाल की कमी से जुड़ा संकेतक माना जाता है। मेघालय में स्टंटिंग कम होना इस बात का संकेत है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी का असर दिखने लगा है। हालांकि सुधार के बावजूद राज्य की स्थिति अभी राष्ट्रीय औसत से पीछे है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग की दर 29.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मेघालय में यह 36.8 प्रतिशत रही। इससे स्पष्ट है कि राज्य को पोषण सुधार की दिशा में लगातार प्रयास जारी रखने होंगे।

स्तनपान से जुड़े सकारात्मक संकेत

सर्वेक्षण में मेघालय में स्तनपान से जुड़े संकेतक भी बेहतर पाए गए। राज्य में 76.4 प्रतिशत बच्चों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया। वहीं छह महीने से कम उम्र के 97.1 प्रतिशत शिशु वर्तमान में स्तनपान कर रहे थे। जन्म के तुरंत बाद स्तनपान और शुरुआती महीनों में केवल मां का दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, वृद्धि और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ये संकेतक बताते हैं कि राज्य में माताओं और परिवारों के बीच शिशु पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

मिशन 1000 डेज की भूमिका

मेघालय सरकार का मिशन 1000 डेज मातृ एवं बाल पोषण को बेहतर बनाने से जुड़ा एक अहम प्रयास है। यह पहल गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के शुरुआती 1000 दिनों पर केंद्रित है। इस अवधि को बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण अनुपूरण, आंगनवाड़ी सेवाएं, महिला समूहों और ग्राम स्तर पर समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अगले सर्वेक्षण से पहले स्टंटिंग में और कमी लाई जाए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनएफएचएस का पूरा नाम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण है।
  • एनएफएचएस-5 की अवधि 2019-21 थी, जबकि एनएफएचएस-6 की अवधि 2023-24 रही।
  • स्टंटिंग बच्चों में लंबे समय तक पोषण की कमी का प्रमुख संकेतक है।
  • मेघालय की स्टंटिंग दर 36.8 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 29.3 प्रतिशत से अधिक है।

मेघालय में स्टंटिंग की दर में गिरावट राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। बेहतर मातृ स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, समय पर स्तनपान और सामुदायिक भागीदारी के जरिए राज्य आने वाले वर्षों में बाल कुपोषण को और कम कर सकता है।

Originally written on June 1, 2026 and last modified on June 1, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *