मुंगेर का 700 वर्ष पुराना वटवृक्ष बना दुनिया का सबसे पुराना वैज्ञानिक रूप से दिनांकित बरगद
बिहार के मुंगेर स्थित एक ऐतिहासिक वटवृक्ष (बरगद) को वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे पुराना सटीक रूप से दिनांकित बरगद घोषित किया है। उच्च-परिशुद्धता रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक के आधार पर इसकी आयु लगभग 700 वर्ष आंकी गई है। यह उपलब्धि न केवल भारत की प्राकृतिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उष्णकटिबंधीय वृक्षों की आयु निर्धारण संबंधी वैज्ञानिक अनुसंधान में भी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह शोध अप्रैल 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल Quaternary Research में प्रकाशित हुआ।
वैज्ञानिक तकनीक से हुआ आयु का निर्धारण
यह विशाल बरगद मुंगेर स्थित इंडियन टोबैको कंपनी (आईटीसी) परिसर में स्थित है। सामान्यतः बरगद जैसे उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वृक्ष-वलय (Growth Rings) नहीं बनते, जिसके कारण पारंपरिक डेंड्रोक्रोनोलॉजी तकनीक से उनकी आयु का निर्धारण कठिन होता है। इस चुनौती को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने लकड़ी से प्राप्त अल्फा-सेल्यूलोज का उपयोग कर उच्च-परिशुद्धता रेडियोकार्बन डेटिंग की, जिससे अधिक विश्वसनीय परिणाम प्राप्त हुए।
शोध और वैज्ञानिकों का योगदान
इस अध्ययन का नेतृत्व लखनऊ स्थित बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. त्रिना बोस ने किया। उनके साथ डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव सहित अन्य शोधकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है। शोध में आधुनिक रेडियोकार्बन विश्लेषण तकनीकों का उपयोग कर बरगद की न्यूनतम आयु लगभग 700 वर्ष निर्धारित की गई।
ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व
पहले यह माना जाता था कि इस बरगद का संबंध ऐतिहासिक बुर्रा बंगला परिसर से है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि यह वृक्ष उस भवन से भी कई शताब्दियों पुराना है। इससे संकेत मिलता है कि यह संभवतः उस प्राकृतिक वन का जीवित अवशेष है, जो कभी इस पूरे क्षेत्र में फैला हुआ था। बरगद के वृक्ष अपनी लटकती हुई वायु-जड़ों के लिए प्रसिद्ध हैं, जो भूमि तक पहुंचकर सहायक तनों का रूप ले लेती हैं और वृक्ष को विशाल क्षेत्र में फैलने में सहायता करती हैं। भारत का राष्ट्रीय वृक्ष Ficus benghalensis दक्षिण एशिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Ficus benghalensis बरगद का वैज्ञानिक नाम है और यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है।
- रेडियोकार्बन डेटिंग जैविक पदार्थों में कार्बन-14 के क्षय को मापकर उनकी आयु का अनुमान लगाने की वैज्ञानिक विधि है।
- अल्फा-सेल्यूलोज लकड़ी का सबसे स्थिर घटक माना जाता है, जिसका उपयोग सटीक वैज्ञानिक आयु निर्धारण में किया जाता है।
- Quaternary Research एक सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका है, जो पृथ्वी के पिछले लगभग 25.8 लाख वर्षों के क्वाटरनरी काल से संबंधित अध्ययनों को प्रकाशित करती है।
- बरगद मोरेसी (Moraceae) कुल का सदस्य है, जिसमें अंजीर और शहतूत जैसी प्रजातियां भी शामिल हैं।
मुंगेर का यह प्राचीन बरगद केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। इसकी वैज्ञानिक आयु निर्धारण से न केवल ऐतिहासिक धारणाओं को नया दृष्टिकोण मिला है, बल्कि भविष्य में अन्य प्राचीन उष्णकटिबंधीय वृक्षों के अध्ययन और संरक्षण के लिए भी एक नई दिशा प्राप्त हुई है।