ओडिशा में 67 हजार करोड़ रुपये की हरित ऊर्जा परियोजनाओं को मिली मंजूरी
ओडिशा ने स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 3 जुलाई 2026 को भारत की एसीएमई ग्रुप और जापान की आईएचआई कॉरपोरेशन के साथ 67,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य राज्य में हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, ग्रीन मेथनॉल, उन्नत विनिर्माण और निर्यात आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। यह निवेश ओडिशा को भारत के स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल परियोजनाएं
समझौते के तहत गंजाम जिले के गोपालपुर में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 0.4 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, गोपालपुर में निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की लागत से जेट्टी-रहित फ्लोटिंग टर्मिनल अवसंरचना भी विकसित की जाएगी। वहीं, जगतसिंहपुर जिले के पारादीप में 34,000 करोड़ रुपये के निवेश से 0.8 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित होगा। इसी परिसर में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से 0.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली ग्रीन मेथनॉल परियोजना भी विकसित की जाएगी।
रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इन परियोजनाओं से लगभग 7,000 से 7,600 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जबकि विभिन्न अनुमानों के अनुसार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलाकर यह संख्या 8,000 से अधिक हो सकती है। परियोजनाएं ग्रीन स्टील, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेंगी। इससे ओडिशा में भारी उद्योगों, निर्यात और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विनिर्माण को नई गति मिलने की उम्मीद है।
निवेश आकर्षित करने में ओडिशा की बढ़ती भूमिका
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी उपस्थित रहे। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले, 2 जुलाई 2026 को, अडानी एंटरप्राइजेज और संयुक्त अरब अमीरात की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी समूह ने राज्य में 1.08 लाख करोड़ रुपये के एल्युमिनियम क्षेत्र के निवेश की घोषणा की थी। इसे ओडिशा के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बताया गया है। लगातार बड़े निवेश राज्य को औद्योगिक और निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत बना रहे हैं।
भारत-जापान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग
भारत और जापान लंबे समय से ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं। हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल जैसी परियोजनाएं दोनों देशों की स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करेंगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना, हरित ईंधन का उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर स्वच्छ औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रीन अमोनिया का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त कम-कार्बन हाइड्रोजन का उपयोग करके किया जाता है।
- ग्रीन मेथनॉल एक कम-कार्बन ईंधन और रासायनिक कच्चा माल है, जिसका उपयोग शिपिंग और उद्योगों में बढ़ रहा है।
- पारादीप ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले का प्रमुख बंदरगाह नगर है और देश के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है।
- गोपालपुर गंजाम जिले में स्थित एक प्रमुख बंदरगाह क्षेत्र है, जहां निर्यात आधारित औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
ओडिशा में प्रस्तावित ये हरित ऊर्जा परियोजनाएं राज्य की औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को भी नई गति देंगी। ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया और मेथनॉल आधारित उद्योग भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जा रहे हैं और इन निवेशों से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।