दिल्ली में मिशन 70 लाख वृक्षारोपण और रिज पुनर्जीवन अभियान की शुरुआत

दिल्ली में मिशन 70 लाख वृक्षारोपण और रिज पुनर्जीवन अभियान की शुरुआत

दिल्ली को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में 7 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण पहल की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नई दिल्ली में मिशन 70 लाख वृक्षारोपण अभियान तथा दिल्ली रिज पुनर्जीवन अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान ग्रीन एक्शन प्लान 2026-27 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राजधानी में हरित क्षेत्र का विस्तार करना, जैव विविधता को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देना है। इसके साथ ही दिल्ली के रिज क्षेत्र के वैज्ञानिक पुनर्स्थापन की भी व्यापक योजना तैयार की गई है।

मिशन 70 लाख वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य

मिशन 70 लाख वृक्षारोपण अभियान के तहत दिल्ली भर में 70 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों का रोपण खुले क्षेत्रों, पार्कों, वन क्षेत्रों तथा सड़कों के किनारे किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और विकास को भी सुनिश्चित करना है ताकि राजधानी का हरित आवरण लगातार बढ़ सके। इससे वायु प्रदूषण कम करने, तापमान नियंत्रित रखने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

दिल्ली रिज पुनर्जीवन योजना

दिल्ली सरकार ने वर्ष 2026 से 2030 तक के लिए रिज वनों के संरक्षण और विकास हेतु एक वैज्ञानिक इको-रिस्टोरेशन योजना तैयार की है। इस योजना के तहत चार वर्षों में 6,303.55 हेक्टेयर क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक देशी पौधे लगाए जाएंगे। यह कार्य दिल्ली के पहले वैज्ञानिक वर्किंग प्लान के आधार पर किया जाएगा, जिसे नवंबर 2025 में स्वीकृति मिली थी। योजना का उद्देश्य रिज क्षेत्र की प्राकृतिक पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करना और वन क्षेत्र की गुणवत्ता में सुधार करना है।

रिज वन और देशी प्रजातियों का संरक्षण

दिल्ली रिज अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है और राजधानी के लिए एक महत्वपूर्ण हरित सुरक्षा कवच का कार्य करता है। पुनर्जीवन योजना के तहत विलायती कीकर जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह पीपल, बरगद, नीम और जामुन जैसे देशी वृक्ष लगाए जाएंगे। इससे स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और वन क्षेत्र अधिक प्राकृतिक स्वरूप प्राप्त करेगा। साथ ही, रिज के 4,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को पहले ही आरक्षित वन का कानूनी दर्जा देकर संरक्षण प्रदान किया जा चुका है।

जल संरक्षण और जनभागीदारी

इस योजना में रिज क्षेत्र के भीतर 70 से अधिक जलाशयों और तालाबों के विकास का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक संरचनाओं के संरक्षण तथा थीम आधारित हरित स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन प्रयासों से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण से जुड़ने का बेहतर अवसर प्राप्त होगा। जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्रीन ड्राइव पोर्टल भी शुरू किया गया है। इस डिजिटल मंच के माध्यम से नागरिक वृक्षारोपण के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं, वृक्ष रथ के जरिए पौधों की आपूर्ति का अनुरोध कर सकते हैं तथा सरकारी नर्सरियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिल्ली रिज अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है और इसे उत्तरी, मध्य, दक्षिण-मध्य तथा दक्षिणी चार भागों में विभाजित किया जाता है।
  • आरक्षित वन भारत में वन भूमि को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण श्रेणी है।
  • विलायती कीकर का वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा (Prosopis juliflora) है, जिसे एक आक्रामक विदेशी प्रजाति माना जाता है।
  • पीपल, बरगद, नीम और जामुन भारत के प्रमुख देशी वृक्ष हैं, जिनका व्यापक उपयोग शहरी वनीकरण कार्यक्रमों में किया जाता है।

दिल्ली में शुरू किए गए ये दोनों अभियान राजधानी के पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता सुनिश्चित होती है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली का पर्यावरण अधिक संतुलित, स्वच्छ और टिकाऊ बन सकता है।

Originally written on July 8, 2026 and last modified on July 8, 2026.

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