महाराष्ट्र ने लागू की राज्य संपीड़ित बायोगैस नीति 2026, स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

महाराष्ट्र ने लागू की राज्य संपीड़ित बायोगैस नीति 2026, स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य संपीड़ित बायोगैस (CBG) नीति 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस नीति के माध्यम से जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन में बदलने की योजना है, जिससे भारत के जलवायु लक्ष्यों और सर्कुलर इकोनॉमी रणनीति को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल “कचरे से संपत्ति” की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

सीबीजी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान

राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए इस नीति के तहत 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि परियोजना डेवलपर्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के माध्यम से सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग की जाएगी।

इसका मुख्य उद्देश्य परियोजनाओं में वित्तीय जोखिम को कम करना और राज्यभर में बड़े पैमाने पर संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों के विकास को तेज करना है। इससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।

कचरे से ऊर्जा उत्पादन पर विशेष जोर

महाराष्ट्र के 423 शहरी स्थानीय निकाय प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस नगरपालिका कचरा उत्पन्न करते हैं। इस कचरे का बड़ा हिस्सा जैविक होता है, जो अक्सर लैंडफिल में जमा कर दिया जाता है। नई नीति के तहत स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित कर बायोगैस उत्पादन में उपयोग किया जा सके।

इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि शहरी स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा।

लैंडफिल और प्रदूषण दोनों में कमी

जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से लैंडफिल पर दबाव कम होगा और मीथेन गैस के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो अल्पकाल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अधिक गर्मी पैदा करती है।

यह नीति कृषि अवशेषों को भी फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने को बढ़ावा देती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आएगी। इससे एक टिकाऊ “वेस्ट-टू-वेल्थ” प्रणाली विकसित होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CBG का पूरा नाम Compressed Biogas है, जो जैविक कचरे से बनने वाला स्वच्छ ईंधन है।
  • गोबरधन (GOBARdhan) योजना जैविक अपशिष्ट को ऊर्जा और संपत्ति में बदलने को बढ़ावा देती है।
  • हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) सार्वजनिक और निजी निवेश के साझा वित्तपोषण वाला ढांचा है।
  • मीथेन एक ग्रीनहाउस गैस है, जिसकी अल्पकालिक तापीय क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक होती है।

यह नीति भारत सरकार की गोबरधन योजना के साथ भी जुड़ी हुई है और क्लस्टर-आधारित बुनियादी ढांचे को समर्थन देती है, जिससे कचरे का संग्रहण और प्रसंस्करण अधिक प्रभावी हो सके। महाराष्ट्र की यह पहल शहरी स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने का मजबूत उदाहरण है। यह नीति भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

Originally written on April 27, 2026 and last modified on April 27, 2026.

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