मध्य प्रदेश ने सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे की शर्त समाप्त की
मध्य प्रदेश सरकार ने जून 2026 में सरकारी नौकरियों और सरकारी कर्मचारियों पर लागू दो-बच्चे की पात्रता शर्त को समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग को प्रस्तावित सिविल सेवा नियमों से इस प्रावधान को हटाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों और वर्तमान कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले इस नियम के दायरे में आते थे।
क्या था दो-बच्चे का नियम?
दो-बच्चे का नियम एक सेवा-शर्त प्रावधान था, जिसके तहत सरकारी नौकरी के लिए पात्रता को व्यक्ति के जीवित बच्चों की संख्या से जोड़ा गया था। मध्य प्रदेश में इस नियम के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माने जाते थे। इस नियम का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करना था, लेकिन समय के साथ इसके सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही।
2001 में लागू हुआ था प्रावधान
यह नियम वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान लागू किया गया था। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अंतर्गत तीसरे बच्चे का जन्म कुछ परिस्थितियों में अनुशासनहीनता माना जाता था। यदि कोई सरकारी कर्मचारी इस प्रावधान का उल्लंघन करता था, तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती थी। इस कारण यह नियम केवल नई नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर भी लागू होता था।
नियमों में संशोधन की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग को पुराने मसौदे को आधिकारिक पोर्टल से हटाने और संशोधित नियम प्रकाशित करने का निर्देश दिया। इसके बाद जारी संशोधित आदेश में प्रस्तावित सिविल सेवा नियमों से दो-बच्चे की शर्त को हटा दिया गया। यह निर्णय राज्य सरकार की सेवा नियमों की समीक्षा और उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
कर्मचारियों और अभ्यर्थियों पर प्रभाव
इस बदलाव का लाभ उन सरकारी कर्मचारियों और नौकरी के अभ्यर्थियों को मिलेगा जो पहले दो-बच्चे की शर्त के कारण प्रभावित हो सकते थे। राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार लगभग 30,000 शिक्षकों पर इस नियम के कारण नौकरी खोने का खतरा मंडरा रहा था। नियम हटने के बाद भविष्य में नियुक्तियों और सेवा शर्तों में इस आधार पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा निर्णय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू नहीं होगा। अर्थात जिन कर्मचारियों को पहले दो-बच्चे के नियम के तहत सेवा से हटाया गया था, उन्हें पुनः बहाल नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था केवल वर्तमान और भविष्य के मामलों पर लागू होगी तथा पहले लिए गए प्रशासनिक निर्णय यथावत बने रहेंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 राज्य सरकारी कर्मचारियों के आचरण संबंधी प्रावधानों को नियंत्रित करते हैं।
- दो-बच्चे का नियम सरकारी सेवा में पात्रता और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा हुआ था।
- 26 जनवरी 2001 वह कट-ऑफ तिथि थी, जिसके बाद जन्मे तीसरे बच्चे पर यह प्रावधान लागू होता था।
- सामान्य प्रशासन विभाग मध्य प्रदेश में सेवा नियमों और कार्मिक मामलों का प्रमुख विभाग है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दो-बच्चे की शर्त को समाप्त करना राज्य की सेवा नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। यह निर्णय सरकारी नौकरी के अवसरों को अधिक समावेशी बनाने और सेवा नियमों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।