असम-नागालैंड सीमा पर तेल और गैस उत्पादन के लिए त्रिपक्षीय समझौता
भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार ने 11 जून 2026 को असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की संयुक्त खोज एवं उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सीमा विवादों से प्रभावित छह चिन्हित तेल एवं गैस क्षेत्रों और 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के सीमा क्षेत्र को कवर करता है। इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से अप्रयुक्त पड़े हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन कर क्षेत्रीय विकास और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
समझौते की प्रमुख विशेषताएं
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ऐसे क्षेत्रों में तेल और गैस गतिविधियों के लिए एक औपचारिक ढांचा प्रदान करता है, जो 1990 के दशक के मध्य से सीमा और अधिकार क्षेत्र संबंधी विवादों के कारण विकास से वंचित रहे हैं। समझौते के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
तेल और गैस संसाधनों का महत्व
कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस हाइड्रोकार्बन संसाधन हैं, जो मुख्य रूप से अवसादी बेसिनों में पाए जाते हैं। इनका उत्पादन ड्रिलिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाता है। प्राकृतिक गैस का उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है, जबकि कच्चा तेल परिवहन ईंधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का प्रमुख आधार है। ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए इन संसाधनों का अत्यधिक महत्व है।
राजस्व साझेदारी की व्यवस्था
समझौते के तहत तेल और गैस उत्पादन से प्राप्त होने वाले राजस्व को असम और नागालैंड के बीच 50:50 के अनुपात में साझा किया जाएगा। यह मॉडल उन परियोजनाओं में अपनाया जाता है जहां एक से अधिक पक्ष किसी संसाधन क्षेत्र पर दावा रखते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्तमान उत्पादन क्षमता, जो लगभग 1,000 से 1,500 बैरल प्रतिदिन है, भविष्य में दस गुना से अधिक बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि एक क्षेत्र से ही 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
सीमा क्षेत्रों के विकास की दिशा में कदम
असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में कई दशकों से हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाएं मौजूद थीं, लेकिन क्षेत्रीय विवादों के कारण इनका पूर्ण उपयोग नहीं हो सका। यह समझौता उन बाधाओं को दूर करने और संसाधनों के विकास के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास है। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने भी संकेत दिया है कि यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में प्रारंभिक छह क्षेत्रों से आगे बढ़कर अन्य संभावित क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार किया जा सकता है।
भारत के तेल उद्योग में असम का महत्व
असम भारत के सबसे पुराने तेल उत्पादक राज्यों में से एक है। डिगबोई को भारत में प्रारंभिक पेट्रोलियम उत्पादन के केंद्रों में गिना जाता है। राज्य में लंबे समय से तेल एवं गैस उद्योग का विकास होता रहा है और यह देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस नए समझौते से पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- असम भारत के सबसे पुराने तेल उत्पादक राज्यों में से एक है।
- डिगबोई (असम) भारत में प्रारंभिक पेट्रोलियम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
- प्राकृतिक गैस एक जीवाश्म ईंधन है और इसका उपयोग उर्वरक, बिजली उत्पादन तथा उद्योगों में किया जाता है।
- समझौता ज्ञापन (MoU) सहयोग के लिए एक औपचारिक लेकिन सामान्यतः गैर-बाध्यकारी समझौता होता है।
- संसाधन परियोजनाओं में राजस्व साझेदारी मॉडल का उपयोग तब किया जाता है जब एक से अधिक पक्ष संबंधित क्षेत्र पर दावा रखते हों।
असम, नागालैंड और केंद्र सरकार के बीच हुआ यह त्रिपक्षीय समझौता पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा संसाधनों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल तेल और गैस उत्पादन बढ़ने की संभावना है, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और राज्यों के बीच सहयोग को भी नई मजबूती मिल सकती है।