मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में मिजोरम देश में सबसे आगे
मिजोरम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तीसरे चरण के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए 12 जून 2026 तक 68.05 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ मिजोरम उन 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है, जहां यह डिजिटलीकरण अभियान चलाया जा रहा है। राज्य में यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।
विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा आयोजित एक व्यापक मतदाता सूची अद्यतन अभियान है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना तथा अपात्र या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को हटाना होता है। मिजोरम में यह अभियान 20 मई 2026 को शुरू हुआ था और गणना या एन्यूमरेशन चरण 28 जून 2026 तक जारी रहने वाला है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की जानकारी एकत्र कर उसे डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाता है।
जिलावार प्रगति रही प्रभावशाली
मिजोरम के कई जिलों ने डिजिटलीकरण में अत्यंत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। 12 जून 2026 तक ख्वाजावल जिले ने 96.16 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा कर लिया था, जो राज्य में सबसे अधिक है। इसके अलावा चंफाई जिले ने 92.57 प्रतिशत और सेरछिप जिले ने 90.93 प्रतिशत डिजिटलीकरण हासिल किया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।
गणना प्रपत्रों का व्यापक वितरण
मिजोरम ने गणना प्रपत्रों के वितरण में भी लगभग पूर्ण सफलता प्राप्त की है। राज्य में 1,301 ब्लॉक लेवल अधिकारियों (BLOs) के माध्यम से 99.90 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। ब्लॉक लेवल अधिकारी चुनाव आयोग के जमीनी स्तर के प्रतिनिधि होते हैं, जो मतदाता सत्यापन, प्रपत्र वितरण और घर-घर जाकर मतदाता संबंधी जानकारी एकत्र करने का कार्य करते हैं। इस अभियान की सफलता में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
चुनाव आयोग की भूमिका
भारत निर्वाचन आयोग देश में चुनावों के संचालन और मतदाता सूचियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है। यह समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कर उन्हें अद्यतन रखता है। मतदाता सूची किसी निर्वाचन क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाताओं का आधिकारिक रिकॉर्ड होती है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इन सूचियों का सही और अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है।
डिजिटलीकरण का महत्व
मतदाता सूची के डिजिटलीकरण से डेटा प्रबंधन अधिक आसान और सटीक हो जाता है। इससे दोहराव वाली प्रविष्टियों की पहचान, त्रुटियों का सुधार और नए मतदाताओं का पंजीकरण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त डिजिटल रिकॉर्ड चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने में भी सहायता करते हैं। यही कारण है कि निर्वाचन आयोग इस दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है।
मिजोरम का उत्कृष्ट प्रदर्शन
मिजोरम द्वारा प्राप्त 68.05 प्रतिशत डिजिटलीकरण दर यह दर्शाती है कि राज्य प्रशासन और चुनाव अधिकारियों ने अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया है। उच्च प्रपत्र वितरण दर और जिलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन इस सफलता के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। राज्य की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक संवैधानिक संस्था है।
- विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- मतदाता सूची प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताओं की आधिकारिक सूची होती है।
- ब्लॉक लेवल अधिकारी (BLO) मतदाता सत्यापन और घर-घर सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- मिजोरम में ख्वाजावल, चंफाई और सेरछिप जिलों ने 90 प्रतिशत से अधिक डिजिटलीकरण दर्ज किया है।
- मिजोरम में 1,301 ब्लॉक लेवल अधिकारियों के माध्यम से 99.90 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित किए गए।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में मिजोरम का शीर्ष स्थान लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिजिटलीकरण और व्यापक मतदाता सत्यापन से चुनावी व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सटीक और विश्वसनीय बनेगी, जिससे लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूती मिलेगी।