एनसीएलटी की डिजिटल पहल से न्यायिक सेवाओं में तेजी
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने 12 अगस्त 2026 को ई-इंस्पेक्शन और ई-सर्टिफाइड कॉपी सेवाओं की शुरुआत की। इन सेवाओं के जरिए अब न्यायिक रिकॉर्ड और प्रमाणित प्रतियां इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
डिजिटल रिकॉर्ड तक आसान पहुंच
ई-इंस्पेक्शन सेवा के तहत अधिवक्ता, वादकारी और अन्य संबंधित पक्ष अब न्यायिक अभिलेखों को डिजिटल रूप में देख सकेंगे। इससे भौतिक फाइलों पर निर्भरता कम होगी और रिकॉर्ड देखने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
ई-सर्टिफाइड कॉपी सेवा के माध्यम से प्रमाणित प्रतियां भी डिजिटल प्रक्रिया से प्राप्त की जा सकेंगी। इससे दस्तावेजों की मैनुअल कलेक्शन, लंबी प्रतीक्षा और कागजी कार्रवाई में कमी आएगी।
एनसीएलटी की व्यापक डिजिटल रूपांतरण योजना
इन सेवाओं को एनसीएलटी ने अपने बड़े डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रम से जोड़ा है। इसमें नया रूप दिया गया वेबसाइट प्लेटफॉर्म और ई-कोर्ट्स 2.0 पहल भी शामिल है। उद्देश्य यह है कि न्यायिक सेवाएं तकनीक के सहारे अधिक सुलभ और समयबद्ध बनें।
एनसीएलटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने इन सेवाओं का उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब न्यायिक संस्थानों में डिजिटल केस मैनेजमेंट और ऑनलाइन सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
मामलों के निपटारे में प्रशासनिक सुधार
एनसीएलटी ने केवल डिजिटल सेवाओं तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि लंबित मामलों की निगरानी के लिए डेटा-आधारित व्यवस्था भी अपनाई है। इसके जरिए पेंडेंसी, कार्यभार और अदालत के समय के बेहतर उपयोग पर नजर रखी जाती है। जरूरत के अनुसार विशेष पीठों का गठन भी किया जाता है, ताकि सुनवाई की गति बढ़ाई जा सके।
अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एनसीएलटी ने 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी, जिनका कुल मूल्य लगभग 5,517.66 करोड़ रुपये रहा। इसे दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद पहली तिमाही में उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन बताया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एनसीएलटी की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत की गई थी।
- यह एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो कंपनी कानून और दिवाला मामलों की सुनवाई करता है।
- दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 ने भारत में समयबद्ध insolvency resolution की व्यवस्था बनाई।
- ई-कोर्ट्स 2.0 तकनीक आधारित न्यायिक सेवाओं को मजबूत करने की राष्ट्रीय पहल है।
एनसीएलटी की यह पहल न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक के बढ़ते उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रिकॉर्ड तक पहुंच, दस्तावेजों की उपलब्धता और मामलों के प्रबंधन में अधिक दक्षता आने की संभावना है।