राजस्थान में नागौर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन विस्तार को मंजूरी

राजस्थान में नागौर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन विस्तार को मंजूरी

केंद्र सरकार ने 10 जून 2026 को राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-62 (एनएच-62) के नागौर-बीकानेर खंड को चार लेन में विकसित करने के लिए 1,359 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना सड़क अवसंरचना को मजबूत करने, यातायात क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना का क्रियान्वयन बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत किया जाएगा, जो भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी आधारित अवसंरचना विकास का एक प्रमुख मॉडल है।

राष्ट्रीय राजमार्ग-62 का महत्व

राष्ट्रीय राजमार्ग-62 राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक है, जो राज्य के विभिन्न जिलों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नागौर और बीकानेर के बीच का यह मार्ग पश्चिमी राजस्थान के उस क्षेत्र से होकर गुजरता है जहां रेगिस्तानी भूभाग और लंबी दूरी के परिवहन गलियारे स्थित हैं। यह मार्ग माल परिवहन, यात्री आवागमन तथा क्षेत्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क की क्षमता बढ़ने से परिवहन अधिक सुगम और सुरक्षित होने की उम्मीद है।

चार लेन विस्तार से मिलने वाले लाभ

चार लेन निर्माण का अर्थ है सड़क को चार यातायात लेनों तक विस्तारित करना, जिससे वाहनों की आवाजाही क्षमता बढ़ जाती है। इससे यातायात जाम कम होगा, यात्रा समय घटेगा और सड़क सुरक्षा में सुधार होगा। इसके अलावा भारी मालवाहक वाहनों और लंबी दूरी की यात्री सेवाओं को भी बेहतर सुविधा मिलेगी। सड़क अवसंरचना में सुधार से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल क्या है?

बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) व्यवस्था है। इस मॉडल में किसी निजी कंपनी को सड़क का निर्माण, संचालन और रखरखाव करने की जिम्मेदारी दी जाती है। निजी डेवलपर एक निर्धारित रियायत अवधि के दौरान टोल संग्रह या अन्य राजस्व स्रोतों के माध्यम से अपनी लागत और निवेश की वसूली करता है। रियायत अवधि समाप्त होने के बाद परियोजना का स्वामित्व सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाता है। इस मॉडल में यातायात और राजस्व से जुड़े जोखिम मुख्य रूप से निजी कंपनी के पास होते हैं, जिससे सरकार पर वित्तीय भार कम पड़ता है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल से अंतर

बीओटी मॉडल की तुलना में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) में सरकार परियोजना लागत का एक बड़ा हिस्सा वहन करती है। इससे निजी डेवलपर का वित्तीय जोखिम कम हो जाता है। भारत में सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए दोनों मॉडल व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, लेकिन बीओटी मॉडल में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक होती है।

राजस्थान में सड़क अवसंरचना का महत्व

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। विशाल भौगोलिक क्षेत्र और विभिन्न जिलों के बीच बेहतर संपर्क सुनिश्चित करने के लिए राज्य में विस्तृत सड़क नेटवर्क विकसित किया गया है। राजमार्ग विस्तार परियोजनाएं राज्य में औद्योगिक गतिविधियों, पर्यटन, कृषि व्यापार और माल परिवहन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नागौर-बीकानेर मार्ग का उन्नयन भी इसी व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय राजमार्ग-62 राजस्थान का एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग है।
  • बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल सार्वजनिक-निजी भागीदारी आधारित अवसंरचना विकास मॉडल है।
  • हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) भारत में सड़क वित्तपोषण का एक अन्य प्रमुख मॉडल है।
  • राजस्थान क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य है।

नागौर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन विस्तार की यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान की सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत करेगी। इससे यातायात क्षमता बढ़ेगी, यात्रा समय कम होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से देश में अवसंरचना विकास को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।

Originally written on June 11, 2026 and last modified on June 11, 2026.

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