भारत 2025 में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना
भारत ने वर्ष 2025 में भी वैश्विक रक्षा व्यय के मामले में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी और दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना रहा। भारत का कुल सैन्य व्यय 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी रहे। साथ ही, भारत 2021–25 की अवधि में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख हथियार आयातक भी रहा, जिसका वैश्विक हथियार आयात में 8.2 प्रतिशत हिस्सा रहा।
भारत का बढ़ता सैन्य व्यय
भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, सीमाई सुरक्षा आवश्यकताओं और आधुनिक सैन्य तकनीकों के विकास के कारण रक्षा बजट में वृद्धि देखी गई है। सैन्य व्यय में सशस्त्र बलों, रक्षा मंत्रालय, सैन्य संचालन, प्रशिक्षण, उपकरणों की खरीद और अन्य रक्षा संबंधी गतिविधियों पर होने वाला खर्च शामिल होता है। भारत का बढ़ता रक्षा निवेश देश की सुरक्षा और सामरिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हथियार आयात में गिरावट के संकेत
हालांकि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, लेकिन 2016–20 और 2021–25 की अवधियों की तुलना करने पर हथियार आयात में 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार यह गिरावट भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत है। देश अब अधिक संख्या में हथियार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों का डिजाइन और निर्माण स्वयं करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि कुछ घरेलू परियोजनाओं में उत्पादन संबंधी देरी भी देखी गई है।
रूस अब भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
भारत के लिए रूस अब भी प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है। वर्ष 2021–25 के दौरान भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा 2016–20 में 51 प्रतिशत और 2011–15 में 70 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अपने रक्षा आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। फ्रांस 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना, जबकि इज़राइल 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह बदलाव भारत की बहु-स्रोत रक्षा खरीद नीति को दर्शाता है।
वैश्विक हथियार हस्तांतरण का परिदृश्य
विश्व स्तर पर 2016–20 और 2021–25 के बीच प्रमुख हथियारों के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस अवधि में यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार प्राप्तकर्ता देश बनकर उभरा। प्रमुख हथियार हस्तांतरण में लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, युद्धपोत, टैंक और बख्तरबंद वाहन जैसी सैन्य प्रणालियां शामिल होती हैं। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण हथियारों की मांग में वृद्धि देखी गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” सिपरी (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) सैन्य व्यय और हथियार हस्तांतरण का वैश्विक स्तर पर अध्ययन करता है। ” वर्ष 2021–25 के दौरान वैश्विक प्रमुख हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही। ” भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 2011–15 के 70 प्रतिशत से घटकर 2021–25 में 40 प्रतिशत रह गई। ” फ्रांस और इज़राइल क्रमशः भारत के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता रहे। भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश रक्षा बजट बढ़ाकर अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशी निर्भरता कम करने का प्रयास भी कर रहा है। आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और रणनीतिक साझेदारियों का संतुलन भारत की रक्षा नीति का प्रमुख आधार बना रहेगा।