ग्रेट निकोबार द्वीप पर बनेगा द्वि-उपयोगी हवाई अड्डा, केंद्र ने दी ₹13,000 करोड़ तक की मंजूरी
केंद्र सरकार ने 8 जून 2026 को ग्रेट निकोबार द्वीप पर एक द्वि-उपयोगी (ड्यूल-यूज) हवाई अड्डे के निर्माण के लिए ₹13,000 करोड़ तक की मंजूरी प्रदान की है। यह हवाई अड्डा ग्रेट निकोबार परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा और नागरिक उड्डयन के साथ-साथ सैन्य संचालन के लिए भी उपयोग किया जाएगा। भारतीय नौसेना सहित रक्षा बलों को भी इस हवाई अड्डे की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे भारत की सामरिक क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना?
ग्रेट निकोबार परियोजना बंगाल की खाड़ी में स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप के समग्र विकास की एक बहुआयामी योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹81,000 करोड़ से ₹92,000 करोड़ के बीच आंकी गई है। परियोजना के अंतर्गत गलाथिया खाड़ी में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, 450 मेगावोल्ट-एम्पियर क्षमता का गैस एवं सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र, एक नया आधुनिक टाउनशिप और कैंपबेल बे में ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य द्वीप को आर्थिक, सामरिक और बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण से सशक्त बनाना है।
हवाई अड्डे की प्रमुख विशेषताएं
कैंपबेल बे में प्रस्तावित यह ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसे 4,000 पीक आवर यात्रियों को संभालने की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2040 तक इसकी वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 13.5 लाख यात्रियों तक पहुंचने का अनुमान है। परियोजना को अगले पांच वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह हवाई अड्डा क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार को भी प्रोत्साहित करेगा।
सामरिक महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा
यह परियोजना भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रेट निकोबार द्वीप हिंद महासागर, अंडमान सागर और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। द्वि-उपयोगी हवाई अड्डा नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा। रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय संयुक्त रूप से इस परियोजना का वित्तपोषण करेंगे। इससे भारतीय नौसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी तथा क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और मजबूत होगी।
पर्यावरण और जनजातीय समुदायों से जुड़े प्रावधान
परियोजना के लिए लगभग 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा तथा अनुमानित 9.64 लाख पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि परियोजना के अंतर्गत आधे से अधिक क्षेत्र को हरित आवरण के रूप में बनाए रखने की योजना तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शोम्पेन और निकोबारी जनजातीय समुदायों के विस्थापन का कोई प्रस्ताव नहीं है। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न संरक्षण उपायों को भी शामिल किया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी प्रमुख द्वीप है। ” मलक्का जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। ” राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भारत में पर्यावरणीय मामलों के निपटारे के लिए एक विशेष न्यायिक संस्था है। ” नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख सार्वजनिक नीति और रणनीतिक विचार मंच है। ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित द्वि-उपयोगी हवाई अड्डा भारत के बुनियादी ढांचा विकास और सामरिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे क्षेत्रीय संपर्क, पर्यटन, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।