भारत-सेशेल्स साझेदारी से मत्स्य, एक्वाकल्चर और ब्लू इकोनॉमी को नई गति
भारत और सेशेल्स ने नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक में मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। 25 अगस्त 2026 को हुई इस बैठक का नेतृत्व भारत के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिकही और सेशेल्स के मत्स्य, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्री एच.ई. श्री वालेस कॉसग्रोव ने किया। बातचीत का फोकस समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, तकनीकी सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं के जरिए दोनों देशों की क्षमता बढ़ाने पर रहा।
मत्स्य और एक्वाकल्चर सहयोग पर केंद्रित बातचीत
बैठक में दोनों पक्षों ने मत्स्य और एक्वाकल्चर पर प्रस्तावित द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर विस्तार से विचार किया। चर्चा में मरीन एक्वाकल्चर या मैरिकल्चर, आधुनिक हैचरी विकास, टूना मत्स्य के बेहतर प्रबंधन और फिश स्टॉक असेसमेंट जैसे विषय शामिल रहे। मैरिकल्चर समुद्री जल में जीवों के पालन की प्रक्रिया है, जबकि हैचरी नियंत्रित परिस्थितियों में मछली के बीज या लार्वा तैयार करने की सुविधा होती है।
फिश स्टॉक असेसमेंट के जरिए किसी क्षेत्र में मछलियों की संख्या, संरचना और उपलब्धता का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है। यह संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और अत्यधिक दोहन से बचाव के लिए अहम माना जाता है।
तकनीक, निगरानी और डेटा प्रणाली पर जोर
दोनों देशों ने मत्स्य प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, डिजिटल फिशरीज डेटा सिस्टम और निगरानी, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण ढांचे को मजबूत करने पर भी चर्चा की। ऐसे सिस्टम मछली पकड़ने की गतिविधियों पर नजर रखने, नियमों के पालन को सुनिश्चित करने और अवैध मछली पकड़ने को रोकने में मदद करते हैं।
बैठक में पारस्परिक प्रयोगशाला पहुंच और संयुक्त पायलट परियोजनाओं की संभावना पर भी बात हुई। इसके साथ ही वार्षिक कार्य योजनाओं को सहयोग के व्यवस्थित क्रियान्वयन का माध्यम बनाने पर सहमति बनी। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर व्यावहारिक स्तर पर आगे बढ़ सकता है।
ब्लू इकोनॉमी और टूना वैल्यू चेन का विस्तार
चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ब्लू इकोनॉमी रहा, जिसका अर्थ है समुद्री संसाधनों का ऐसा उपयोग जो आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखे। भारत और सेशेल्स ने टूना वैल्यू चेन के विस्तार पर विचार किया, जिसमें प्रोसेसिंग क्षमता, उत्पाद विविधीकरण और फिश-वेस्ट मैनेजमेंट शामिल हैं।
टूना भारतीय महासागर क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक मछली है। इसकी प्रोसेसिंग में सफाई, कैनिंग, फ्रीजिंग और मूल्यवर्धित उत्पादों का विकास शामिल होता है। वहीं, मछली प्रसंस्करण इकाइयों और लैंडिंग केंद्रों से निकलने वाले उप-उत्पादों के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी सहयोग का हिस्सा बनाया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत का मत्स्य विभाग, मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- मैरिकल्चर, एक्वाकल्चर की वह शाखा है जो समुद्री जल में की जाती है।
- फिश स्टॉक असेसमेंट मत्स्य विज्ञान और संसाधन प्रबंधन का एक प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण है।
- मॉनिटरिंग, कंट्रोल और सर्विलांस सिस्टम का उपयोग मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करने और अवैध शिकार रोकने में किया जाता है।
भारत की मत्स्य क्षेत्रीय क्षमता लगातार बढ़ रही है; राष्ट्रीय मछली उत्पादन 19.7 मिलियन टन तक पहुंच चुका है और समुद्री उत्पादों का निर्यात 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का रहा है। ऐसे में सेशेल्स के साथ यह सहयोग भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय साझेदारी दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।