भारत, सिंगापुर और मलेशिया को जोड़ेगा नया आई-2एसईए समुद्री केबल सिस्टम
भारत, सिंगापुर और मलेशिया के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 2 जुलाई 2026 को नए समुद्री फाइबर-ऑप्टिक केबल सिस्टम आई-2एसईए (I-2SEA) का अनावरण किया गया। इस परियोजना में लाइटस्टॉर्म, माइक्रोसॉफ्ट, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस जैसे प्रमुख साझेदार शामिल हैं, जबकि जापान की एनईसी कॉर्पोरेशन को इसका सिस्टम सप्लायर नियुक्त किया गया है। यह परियोजना भविष्य की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड सेवाओं और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
समुद्री केबल सिस्टम क्या होते हैं?
समुद्री केबल (सबमरीन केबल) समुद्र की तलहटी में बिछाई जाने वाली फाइबर-ऑप्टिक संचार लाइनें होती हैं। इन्हीं के माध्यम से देशों के बीच इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, वीडियो कॉल, डिजिटल लेन-देन और बड़े पैमाने पर डेटा का आदान-प्रदान किया जाता है। आज वैश्विक स्तर पर अधिकांश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा इन्हीं समुद्री केबलों के जरिए संचालित होता है, इसलिए इन्हें वैश्विक डिजिटल संचार की रीढ़ माना जाता है।
आई-2एसईए परियोजना की विशेषताएं
आई-2एसईए केबल सिस्टम की अनुमानित लंबाई लगभग 3,600 किलोमीटर होगी। इसका मार्ग सिंगापुर से भारत के आंध्र प्रदेश स्थित मछलीपट्टनम तक होगा। इसके अलावा भारत में दूसरा लैंडिंग स्टेशन दक्षिण चेन्नई में बनाया जाएगा। मछलीपट्टनम को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से हैदराबाद तक सबसे कम समुद्री दूरी उपलब्ध होती है, जिससे डेटा ट्रांसमिशन अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। दक्षिण चेन्नई पहले से ही भारत के प्रमुख समुद्री केबल लैंडिंग केंद्रों में शामिल है और कई अंतरराष्ट्रीय संचार नेटवर्क यहीं से जुड़े हुए हैं।
परियोजना में शामिल प्रमुख कंपनियां
आई-2एसईए परियोजना में लाइटस्टॉर्म बहुमत हिस्सेदारी वाली कंपनी है। माइक्रोसॉफ्ट, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस भी इस परियोजना के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। जापान की एनईसी कॉर्पोरेशन को पूरे सिस्टम के निर्माण और तकनीकी आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सिंगापुर स्थित आसियान केबलशिप समुद्री केबल बिछाने का कार्य करेगी। हालांकि परियोजना की कुल निवेश राशि का अभी खुलासा नहीं किया गया है।
एआई और क्लाउड सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
यह नया केबल सिस्टम विशेष रूप से हाइपरस्केलर कंपनियों, जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं तथा उन उद्यमों के लिए तैयार किया जा रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रशिक्षण और इंफेरेंस से जुड़े बड़े डेटा वर्कलोड संचालित करते हैं। लाइटस्टॉर्म का अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद भारत में उसके जुड़े हुए एआई और क्लाउड ज़ोन की संख्या 19 से बढ़कर 29 हो जाएगी, जिससे डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- समुद्री फाइबर-ऑप्टिक केबल अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी का प्रमुख माध्यम हैं और अधिकांश सीमा-पार डेटा ट्रैफिक इन्हीं के जरिए संचालित होता है।
- एनईसी कॉर्पोरेशन जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो दूरसंचार और नेटवर्क अवसंरचना परियोजनाओं के लिए विश्वभर में जानी जाती है।
- सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया में समुद्री केबल लैंडिंग का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है।
- आई-2एसईए परियोजना के वर्ष 2029 की चौथी तिमाही तक पूरी होकर सेवा के लिए तैयार होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आई-2एसईए समुद्री केबल परियोजना भारत, सिंगापुर और मलेशिया के बीच डिजिटल संपर्क को नई ऊंचाई देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और उच्च गति वाले इंटरनेट नेटवर्क को मजबूत आधार मिलेगा। साथ ही, यह परियोजना भारत को वैश्विक डिजिटल अवसंरचना और डेटा कनेक्टिविटी के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।