स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 मिशन क्या है?
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच प्रक्षेपण विंडो की घोषणा की है। मिशन आगमन (Mission Aagaman) नाम से होने वाला यह अभियान आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र-शार (SDSC-SHAR) से लॉन्च किया जाएगा। यह भारत के पहले निजी रूप से विकसित कक्षीय रॉकेट के प्रक्षेपण का प्रतीक है और देश के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
विक्रम-1 प्रक्षेपण यान की विशेषताएँ
विक्रम-1 एक सात-स्तरीय (सेवन-स्टोरी), बहु-चरणीय (मल्टी-स्टेज) कक्षीय प्रक्षेपण यान है, जिसे स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है। इस रॉकेट का ढांचा पूरी तरह कार्बन कंपोजिट सामग्री से तैयार किया गया है, जिससे इसका भार कम होने के साथ-साथ मजबूती भी अधिक होती है। यह प्रक्षेपण यान निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में लगभग 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को स्थापित करने में सक्षम है। कम वजन और आधुनिक संरचना के कारण यह छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार के लिए एक प्रभावी और किफायती विकल्प माना जा रहा है।
मिशन आगमन के उद्देश्य
मिशन आगमन का प्रमुख उद्देश्य उड़ान के दौरान विभिन्न प्रणालियों से वास्तविक समय (रियल-टाइम) में प्रदर्शन संबंधी आंकड़े एकत्र करना है। इन आंकड़ों के आधार पर रॉकेट के विभिन्न तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा और भविष्य में विकसित किए जाने वाले प्रक्षेपण यानों के डिजाइन को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह मिशन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के उपग्रहों को आंशिक रूप से वाणिज्यिक स्वरूप में अंतरिक्ष तक पहुँचाएगा। इससे भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
विकास यात्रा और महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
1 जुलाई 2026 तक विक्रम-1 के सभी चरणों का एकीकरण पूरा कर लिया गया था और रॉकेट को प्रक्षेपण स्थल पर स्थापित कर दिया गया था। इससे पहले नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के इन्फिनिटी कैंपस के उद्घाटन के दौरान उड़ान के लिए तैयार विक्रम-1 का अनावरण किया था। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इससे पहले 18 नवंबर 2022 को विक्रम-एस का सफल प्रक्षेपण किया था, जो अंतरिक्ष तक पहुँचने वाला भारत का पहला निजी रूप से विकसित रॉकेट बना। हालांकि, विक्रम-एस एक उप-कक्षीय (सबऑर्बिटल) रॉकेट था, जबकि विक्रम-1 पूर्ण रूप से कक्षीय (ऑर्बिटल) प्रक्षेपण यान है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र-शार (SDSC-SHAR) भारत का प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र है, जो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित है।
- लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) का उपयोग मुख्य रूप से पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों और छोटे उपग्रह समूहों (Satellite Constellations) के लिए किया जाता है।
- कार्बन कंपोजिट संरचनाएँ प्रक्षेपण यानों में कम भार और अधिक मजबूती के कारण व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
- विक्रम-एस एक सबऑर्बिटल रॉकेट था, जबकि विक्रम-1 एक ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान है, जो उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।
विक्रम-1 का प्रस्तावित प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यदि मिशन सफल रहता है, तो भारत वैश्विक छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करेगा तथा निजी कंपनियों की भागीदारी से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को नई गति मिलेगी।