भारत-रूस व्यापार साझेदारी को 2030 तक नई ऊंचाई देने की तैयारी
भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। मौजूदा व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर के आसपास है, इसलिए अगले कुछ वर्षों में दोनों देशों को करीब 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल करनी होगी। इसके साथ ही 50 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य और नए द्विपक्षीय निवेश समझौते पर भी चर्चा आगे बढ़ रही है।
औद्योगिक सहयोग पर नई रणनीति
नई दिल्ली में सितंबर 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत बातचीत हुई। चर्चा का दायरा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे, इस्पात मूल्य श्रृंखला, सिविल परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेवाओं, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों तक फैला। यह संकेत है कि दोनों देश पारंपरिक ऊर्जा और रक्षा संबंधों से आगे बढ़कर व्यापक आर्थिक साझेदारी की दिशा में काम कर रहे हैं।
INNOPROM India 2026 से बढ़ी बातचीत
10–11 सितंबर 2026 के आसपास नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM India 2026 प्रदर्शनी ने इस सहयोग को और गति दी। इस मंच पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के बीच औद्योगिक और व्यापारिक सहयोग पर चर्चा हुई। ऐसे मंच दोनों देशों के उद्योगों को एक-दूसरे की जरूरतों, निवेश संभावनाओं और आपूर्ति शृंखला के अवसरों से जोड़ने में मदद करते हैं।
रक्षा, ऊर्जा और निवेश पर फोकस
भारत-रूस वार्ता में रक्षा सहयोग भी प्रमुख रहा। इसमें S-400 की आपूर्ति, ब्रह्मोस के उन्नयन और Su-57 लड़ाकू विमानों के संयुक्त उत्पादन पर बातचीत शामिल थी। ऊर्जा क्षेत्र में तेल और गैस आपूर्ति, उर्वरक खरीद और भारत में रूसी तकनीक से बने परमाणु संयंत्रों के लिए एक संभावित दूसरे स्थल पर विचार किया गया। साथ ही, दोनों देश निवेश को सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए नए Bilateral Investment Treaty पर काम कर रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
- S-400 ट्रायम्फ रूस की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
- ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
- Bilateral Investment Treaty दो देशों के बीच निवेश की सुरक्षा और नियमों को तय करने वाला कानूनी समझौता होता है।
भारत-रूस संबंधों में यह लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाने का नहीं, बल्कि औद्योगिक, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को अधिक संतुलित और विविध बनाने का संकेत देता है। आने वाले वर्षों में इस साझेदारी की सफलता दोनों देशों की आर्थिक प्राथमिकताओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।