दक्षिण रेलवे की पूरी ब्रॉड गेज लाइन अब बिजली से चलेगी

दक्षिण रेलवे की पूरी ब्रॉड गेज लाइन अब बिजली से चलेगी

दक्षिण रेलवे ने अपनी ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। 5,068 रूट किलोमीटर के इस नेटवर्क में तमिलनाडु के 71 किलोमीटर लंबे पट्टुकोट्टई–करैकुडी खंड के विद्युतीकरण के साथ यह उपलब्धि हासिल हुई। इससे अब जोन की पूरी ब्रॉड गेज प्रणाली इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर संचालित हो सकेगी।

अंतिम खंड के साथ पूरी हुई बड़ी उपलब्धि

पट्टुकोट्टई–करैकुडी खंड दक्षिण रेलवे की ब्रॉड गेज नेटवर्क का अंतिम ऐसा हिस्सा था, जो अब तक विद्युतीकृत नहीं था। इस खंड का वैधानिक निरीक्षण 9 सितंबर 2026 को दक्षिण रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता गणेश ने पूरा किया। निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जोन की पूरी BG लाइन अब बिजली आधारित संचालन के लिए तैयार है।

ब्रॉड गेज भारतीय रेल नेटवर्क का सबसे व्यापक मानक है और देश के अधिकांश प्रमुख रेल मार्ग इसी पर चलते हैं। ऐसे में किसी पूरे जोन का 100% विद्युतीकरण न केवल तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि परिचालन दक्षता के लिहाज से भी अहम माना जाता है।

विद्युतीकरण से क्या बदलता है

रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकृत होने से ट्रेनों को डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से चलाया जा सकता है। इससे एक ही मार्ग पर इंजन बदलने की जरूरत कम होती है और संचालन अधिक सुगम बनता है। साथ ही, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से ईंधन पर निर्भरता घटती है और लोकोमोटिव का बेहतर उपयोग संभव होता है।

दक्षिण रेलवे के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पूरे जोन में निर्बाध इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालन का रास्ता खुलता है। लंबी दूरी की सेवाओं और मालगाड़ियों के संचालन में भी इससे स्थिरता और कार्यकुशलता बढ़ती है।

दक्षिण रेलवे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दक्षिण रेलवे भारतीय रेल के 18 जोनों में से एक है। इस जोन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का इतिहास काफी पुराना है। मद्रास, जिसे अब चेन्नई कहा जाता है, में 11 मई 1931 को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन शुरू किया गया था। इसके साथ चेन्नई भारत का दूसरा महानगर बना जिसने इलेक्ट्रिक रेल सेवा अपनाई।

जोन के भीतर एक महत्वपूर्ण अपवाद नीलगिरि माउंटेन रेलवे है। 46 किलोमीटर लंबी यह मीटर-गेज लाइन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और तकनीकी कारणों से इसका विद्युतीकरण संभव नहीं है। इसलिए इस मार्ग पर पारंपरिक स्टीम और हेरिटेज डीजल ट्रैक्शन का उपयोग जारी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दक्षिण रेलवे भारतीय रेल के 18 जोनों में शामिल है।
  • ब्रॉड गेज भारतीय रेल का सबसे सामान्य और व्यापक मानक गेज है।
  • चेन्नई में 11 मई 1931 को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन शुरू हुआ था।
  • 46 किलोमीटर लंबी नीलगिरि माउंटेन रेलवे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

दक्षिण रेलवे का 100% ब्रॉड गेज विद्युतीकरण भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि न केवल संचालन को अधिक कुशल बनाएगी, बल्कि ऊर्जा उपयोग और पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाएगी।

Originally written on September 12, 2026 and last modified on September 12, 2026.

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