कोच्चि में शिप रिपेयर सेक्टर को नई रफ्तार, ड्राईडॉक्स वर्ल्ड–कोचीन शिपयार्ड की साझेदारी
भारत के समुद्री ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ड्राईडॉक्स वर्ल्ड और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने कोच्चि स्थित इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी को चलाने और विस्तार देने के लिए 50:50 संयुक्त उपक्रम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह व्यवस्था भारतीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की मरम्मत सेवाओं को अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से की गई है।
कोच्चि के शिप रिपेयर हब को मिलेगा विस्तार
यह समझौता 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान औपचारिक रूप से किया गया। इसके तहत विल्लिंगडन आइलैंड स्थित मौजूदा सुविधा को नई कंपनी को स्थानांतरित किया जाएगा। कोच्चि की इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी अगस्त 2024 से वाणिज्यिक संचालन में है और इसे अब बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना है।
मौजूदा ढांचे में 6,000 टन क्षमता वाला शिप लिफ्ट और छह वर्कस्टेशन हैं। विस्तार के बाद 10 और वर्कस्टेशन जोड़े जाएंगे, जिससे कुल संख्या 16 हो जाएगी। इससे बड़े और अधिक संख्या में जहाजों की मरम्मत एक साथ संभव हो सकेगी।
साझेदारी की संरचना और प्रबंधन व्यवस्था
यह संयुक्त उपक्रम समान हिस्सेदारी पर आधारित है, लेकिन प्रबंधन ढांचे में ड्राईडॉक्स वर्ल्ड की भूमिका अधिक प्रभावी रहेगी। कंपनी पांच में से तीन निदेशकों को नामित करेगी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वित्तीय अधिकारी तथा मुख्य परिचालन अधिकारी की नियुक्ति भी उसी के पास होगी। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड दो निदेशकों को नामित करेगा।
दोनों पक्ष इस परियोजना में 900-900 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना रखते हैं। यह निवेश न केवल मौजूदा सुविधा के संचालन में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में इसे एक बड़े शिप रिपेयर केंद्र के रूप में विकसित करने में भी सहायक होगा।
भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए क्या है महत्व
यह परियोजना भारत में शिप रिपेयर सेक्टर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक अलग मॉडल मानी जा रही है। अब तक देश में इस तरह की बड़ी साझेदारी कम देखने को मिली है। इससे घरेलू जहाजों की मरम्मत के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता घट सकती है और क्षेत्रीय स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारत सरकार का सार्वजनिक उपक्रम है और यह बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आता है। वहीं ड्राईडॉक्स वर्ल्ड, दुबई स्थित वैश्विक लॉजिस्टिक्स और पोर्ट ऑपरेटर डीपी वर्ल्ड का हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी कोच्चि, केरल में स्थित है और यह अगस्त 2024 से चालू है।
- मौजूदा सुविधा में 6,000 टन क्षमता वाला शिप लिफ्ट और छह वर्कस्टेशन हैं।
- विस्तार के बाद वर्कस्टेशनों की संख्या 16 हो जाएगी।
- ब्रिक्स एक बहुपक्षीय मंच है, जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल रहे हैं।
समझौते के तहत लेनदेन के मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। यदि यह योजना समय पर आगे बढ़ती है, तो कोच्चि भारत के शिप रिपेयर और समुद्री सेवाओं के एक प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक उभर सकता है।