भारत-अमेरिका साझेदारी से समुद्री केबल सुरक्षा को नई मजबूती

भारत-अमेरिका साझेदारी से समुद्री केबल सुरक्षा को नई मजबूती

भारत और अमेरिका ने TRUST (Transforming the Relationship Utilising Strategic Technologies) पहल के तहत अंडरसीa केबल नेटवर्क पर सहयोग बढ़ाया है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि समुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर-ऑप्टिक केबलें दुनिया के डिजिटल ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वहन करती हैं और वैश्विक संचार, वित्तीय सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

TRUST पहल के तहत रणनीतिक सहयोग

TRUST भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकियों पर सहयोग का एक द्विपक्षीय ढांचा है। इसके दायरे में सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी शामिल है। समुद्री केबल नेटवर्क पर बढ़ा हुआ सहयोग इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा है, जिसमें सरकार और उद्योग दोनों के हितधारक शामिल हैं।

समुद्री केबल क्यों हैं इतनी महत्वपूर्ण

अंडरसीa या सबमरीन केबलें समुद्र तल पर बिछाई जाती हैं और लंबी दूरी तक डेटा भेजने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। ये केबलें महाद्वीपों को जोड़ती हैं और इंटरनेट कनेक्टिविटी, बैंकिंग लेनदेन, क्लाउड सेवाओं तथा सीमा-पार संचार को संभव बनाती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है।

इस सहयोग में भरोसेमंद तकनीकी प्रदाताओं, विविध केबल मार्गों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कई लैंडिंग स्टेशनों पर जोर दिया गया है। एक ही स्रोत या एक ही मार्ग पर निर्भरता कम करना नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाता है।

जोखिम और भारत की भूमिका

समुद्री केबल नेटवर्क को भौतिक तोड़फोड़, साइबर हमलों, डेटा इंटरसेप्शन और एकल स्रोत पर निर्भरता जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केबल मार्गों का विविधीकरण और लैंडिंग स्टेशनों की मजबूती बेहद जरूरी हो जाती है।

भारत को सबमरीन डिजिटल अवसंरचना के संभावित केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। इसका कारण देश की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाओं की बढ़ती मांग तथा इसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है। सितंबर 2026 में आयोजित एक कार्यशाला में भी सरकार और उद्योग के विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना की सुरक्षा पर चर्चा की थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • समुद्र के नीचे बिछी केबलें वैश्विक डिजिटल ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ले जाती हैं।
  • सबमरीन केबलें इंटरनेट डेटा, वित्तीय संदेशों और क्लाउड कनेक्टिविटी के लिए उपयोग होती हैं।
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका को जोड़ने वाले प्रमुख केबल मार्गों का केंद्र है।
  • कई लैंडिंग स्टेशन होने से किसी एक बिंदु पर निर्भरता कम होती है और नेटवर्क अधिक सुरक्षित बनता है।

भारत-अमेरिका का यह सहयोग वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में समुद्री केबलों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय संचार और आर्थिक स्थिरता के लिए और भी निर्णायक होती जाएगी।

Originally written on September 12, 2026 and last modified on September 12, 2026.

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