भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक ब्रुसेल्स में संपन्न
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल – टीटीसी) की तीसरी बैठक 14 से 16 जुलाई 2026 तक बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी और 6जी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। यह बैठक भारत और यूरोपीय संघ के बीच तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद का उद्देश्य
व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद भारत और यूरोपीय संघ के बीच स्थापित एक द्विपक्षीय मंच है, जिसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक विषयों पर समन्वय बढ़ाना है। यह मंच नई तकनीकों के विकास, नवाचार, निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए दोनों पक्षों को एक साझा नीति ढांचा प्रदान करता है। तीसरी बैठक ब्रुसेल्स में आयोजित की गई, जो यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ परिषद का मुख्यालय भी है।
अनुसंधान और नवाचार में सहयोग
बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ ने होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी के लिए औपचारिक वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया। यह यूरोपीय संघ का 2021 से 2027 की अवधि के लिए 93.5 अरब यूरो का प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार वित्तपोषण कार्यक्रम है। दोनों पक्षों ने इस प्रक्रिया को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके अलावा, चार वर्षों के लिए 6 करोड़ यूरो के संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों की समीक्षा भी की गई। इन परियोजनाओं में अपशिष्ट से हाइड्रोजन उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से समुद्री प्रदूषण की निगरानी तथा इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के पुनर्चक्रण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
तकनीकी और औद्योगिक सहयोग
भारत और यूरोपीय संघ ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग तकनीकों और परीक्षण सुविधाओं के लिए अपना पहला इनोवेशन हब स्थापित करने का निर्णय लिया। साथ ही, स्वच्छ प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यरत गहन तकनीक (डीप-टेक) स्टार्टअप्स के लिए भारत-यूरोपीय संघ स्टार्टअप साझेदारी शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिससे उन्हें बाजार तक पहुंच और व्यावसायीकरण में सहायता मिलेगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग के तहत सुरक्षित और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, उन्नत विनिर्माण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की डिजाइन सुविधाओं और यूरोपीय संघ चिप्स अधिनियम के अंतर्गत विकसित पायलट परियोजनाओं के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
बैठक में जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं में इसके उपयोग, पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोडमैप तैयार करने, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग तथा 6जी संचार तकनीक पर अनुसंधान को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया। स्वच्छ प्रौद्योगिकी सहयोग के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रणाली, बैटरी पुनर्चक्रण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समुद्री प्रदूषण निगरानी जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- होराइजन यूरोप यूरोपीय संघ का वर्ष 2021–2027 के लिए प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार वित्तपोषण कार्यक्रम है।
- यूरोपीय संघ चिप्स अधिनियम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और चिप निर्माण क्षमता बढ़ाना है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो मशीनों को सीखने, तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
- 6जी अगली पीढ़ी की वायरलेस संचार तकनीक है, जिस पर वर्तमान में विभिन्न देशों और क्षेत्रीय समूहों द्वारा अनुसंधान किया जा रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई यह बैठक दोनों पक्षों की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करती है। अनुसंधान, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भविष्य में आर्थिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।