भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 2028-29 सदस्यता के लिए अभियान शुरू किया
भारत ने 13 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने की अपनी आधिकारिक दावेदारी का अभियान शुरू कर दिया। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के SHANTI विजन का अनावरण किया। इस अभियान के माध्यम से भारत ने वैश्विक शांति, सुरक्षा, सतत विकास और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, भारत ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी स्थान दिलाने पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अस्थायी सदस्यता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है तथा यह चुनाव क्षेत्रीय समूहों के आधार पर होता है। वर्ष 2028-29 के चुनाव चक्र में एशिया-प्रशांत समूह के लिए एक सीट उपलब्ध है। इस सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। चुनाव जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। भारत अब तक सुरक्षा परिषद का आठ बार अस्थायी सदस्य रह चुका है और उसका पिछला कार्यकाल 2021-22 रहा था।
SHANTI विजन की प्रमुख विशेषताएँ
SHANTI का पूर्ण रूप Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity है। यह भारत की नई बहुपक्षीय रणनीति का आधार है, जिसमें वैश्विक शांति और सहयोग के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस विजन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, आतंकवाद और उसके वित्तपोषण पर सख्ती, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना, सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन तथा वैश्विक संस्थाओं में आवश्यक सुधारों की वकालत शामिल है। भारत का मानना है कि नियम, विश्वास और ईमानदारी पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सहयोग वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रदान कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका
भारत वर्ष 1945 से संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है। पिछले कई दशकों से भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सक्रिय योगदान देता रहा है और एशिया, अफ्रीका तथा मध्य-पूर्व के विभिन्न मिशनों में हजारों सैनिक एवं अधिकारी भेज चुका है। इसके अलावा भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग करता रहा है ताकि विकासशील देशों को निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत का मानना है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक समावेशी बनाया जाना चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत हुई थी।
- सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।
- सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होता है।
- भारत वर्ष 2021-22 में सुरक्षा परिषद का सबसे हालिया अस्थायी सदस्य रहा था।
- भारत अब तक आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना जा चुका है।
भारत का नया SHANTI विजन उसकी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि भारत 2027 का चुनाव जीतता है, तो वह 2028-29 के दौरान सुरक्षा परिषद में एक बार फिर वैश्विक शांति, विकास और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएगा। साथ ही, भारत संयुक्त राष्ट्र सुधारों और विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ाने के अपने लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों को भी आगे बढ़ाएगा।