भारत-म्यांमार के बीच 23वीं राष्ट्रीय सीमा समन्वय बैठक संपन्न

भारत-म्यांमार के बीच 23वीं राष्ट्रीय सीमा समन्वय बैठक संपन्न

भारत और म्यांमार के बीच 23वीं राष्ट्रीय स्तर की सीमा समन्वय बैठक 7-8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने किया, जबकि म्यांमार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप गृह मामलों के मंत्री मेजर जनरल मिन थू ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को मजबूत बनाना था। इस दौरान सीमा पर शांति, स्थिरता और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत-म्यांमार सीमा और सुरक्षा सहयोग

भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है। भारत की ओर से यह सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है, जबकि म्यांमार में यह सगाइंग क्षेत्र और चिन राज्य से जुड़ी हुई है। इस सीमा पर लागू फ्री मूवमेंट रेजीम (एफएमआर) के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को निर्धारित नियमों के तहत सीमापार आवाजाही की सुविधा दी जाती है। बैठक में सीमा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और आतंकवाद, उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी, मानव तस्करी, वन्यजीव तस्करी तथा साइबर अपराध जैसी चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त परिचालन समन्वय और क्षमता निर्माण को और मजबूत करने का निर्णय लिया।

संपर्क परियोजनाओं पर विशेष चर्चा

बैठक में भारत और म्यांमार के बीच संपर्क बढ़ाने वाली प्रमुख परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना के माध्यम से कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह से जोड़ा गया है, जहां से अंतर्देशीय जलमार्ग और सड़क मार्ग के जरिए मिजोरम तक संपर्क स्थापित होता है। इसके अलावा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना पर भी चर्चा हुई, जो मणिपुर के मोरेह को म्यांमार के रास्ते थाईलैंड के माए सॉट से जोड़ती है। ये परियोजनाएं क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

द्विपक्षीय सहयोग और रणनीतिक महत्व

भारत ने म्यांमार को अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) पहल के अंतर्गत महत्वपूर्ण स्थान दिया है। बैठक के दौरान म्यांमार ने आश्वासन दिया कि उसकी भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने सीमा क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत और म्यांमार के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई लगभग 1,643 किलोमीटर है।
  • भारत के अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम राज्य सीधे म्यांमार की सीमा से जुड़े हैं।
  • कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना कोलकाता को म्यांमार के माध्यम से मिजोरम से जोड़ती है।
  • ‘महासागर’ का पूरा नाम Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions है।

भारत और म्यांमार के बीच आयोजित यह सीमा समन्वय बैठक दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीमा सुरक्षा, संपर्क परियोजनाओं और साझा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बल मिलेगा, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के विकास और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत की कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

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