भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने एसीआईटीआई प्रौद्योगिकी साझेदारी की शुरुआत की
भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने 9 जुलाई 2026 को ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पार्टनरशिप (ACITI) की शुरुआत की। यह त्रिपक्षीय साझेदारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास पर केंद्रित है। इस पहल का उद्देश्य तीनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाकर नवाचार को बढ़ावा देना, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की दिशा में सहयोग को मजबूत करना है।
एसीआईटीआई साझेदारी की रूपरेखा
एसीआईटीआई (Australia–Canada–India Technology and Innovation Partnership) भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बीच एक त्रिपक्षीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी है। इसकी घोषणा 22 नवंबर 2025 को जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बैठक के बाद की गई थी। यह साझेदारी उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित उपलब्धता तथा तकनीकी विकास से जुड़े औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
एसीआईटीआई के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसके अलावा हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविध आपूर्ति श्रृंखला तथा नेट-ज़ीरो उत्सर्जन से जुड़े प्रयासों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह साझेदारी टिकाऊ और सुरक्षित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के साथ-साथ भविष्य की ऊर्जा और डिजिटल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तीनों देशों की विशेष क्षमताओं का समन्वय
इस साझेदारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें तीनों देशों की अलग-अलग विशेषज्ञताओं का लाभ उठाया जाएगा। कनाडा कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान और स्वच्छ प्रौद्योगिकी में अग्रणी माना जाता है। भारत के पास विशाल डिजिटल अवसंरचना, तकनीकी प्रतिभा और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की क्षमता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण में मजबूत स्थिति रखता है। एसीआईटीआई का उद्देश्य इन क्षमताओं को एकीकृत कर नवाचार, औद्योगिक विकास और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।
रणनीतिक महत्व
एसीआईटीआई की शुरुआत के साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया भारत को शांतिपूर्ण ऊर्जा उपयोग के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम निर्यात शुरू कर सकेगा। वहीं कनाडा भी वर्ष 2026 में वैश्विक व्यापार विवादों और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों के बीच नए अंतरराष्ट्रीय सहयोगों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। ऐसे में यह त्रिपक्षीय साझेदारी आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एसीआईटीआई (ACITI) का पूरा नाम ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पार्टनरशिप है।
- क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और रक्षा तकनीकों में किया जाता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है, जो मशीनों को सीखने, तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
- नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का अर्थ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और उनके अवशोषण के बीच संतुलन स्थापित करना है।
भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बीच एसीआईटीआई साझेदारी भविष्य की तकनीकों, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल तकनीकी नवाचार को गति देगी, बल्कि तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करेगी और वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास के प्रयासों को बल देगी।