भारत–मोरक्को रक्षा सहयोग को नई औपचारिकता
भारत और मोरक्को ने 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अपनी संयुक्त रक्षा समिति (Joint Defence Committee) की पहली बैठक कर रक्षा सहयोग को एक औपचारिक ढांचा दे दिया। यह बैठक सितंबर 2025 में हुए रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
संयुक्त रक्षा समिति क्यों अहम है
संयुक्त रक्षा समिति दो देशों के बीच रक्षा सहयोग पर नियमित बातचीत का संस्थागत मंच होती है। इसके जरिए सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, शांति स्थापना, साइबर रक्षा और रक्षा उद्योग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। भारत और मोरक्को के मामले में इस समिति का उद्देश्य सहयोग को केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक और दीर्घकालिक रूप देना है।
इस बैठक में सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मोरक्को की रॉयल आर्म्ड फोर्सेज के 2nd Bureau के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अब्देल्लाह अथमानी ने की। मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल 7 से 10 सितंबर 2026 तक भारत दौरे पर रहा और उसने भारतीय रक्षा उद्योगों के साथ भी बातचीत की।
रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग पर फोकस
बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन, संयुक्त उपक्रम, प्रौद्योगिकी सहयोग, रखरखाव और दीर्घकालिक सपोर्ट जैसे विषयों पर विचार किया। यह संकेत है कि दोनों देश भविष्य में रक्षा संबंधों को खरीद-फरोख्त से आगे बढ़ाकर उत्पादन और तकनीकी साझेदारी की दिशा में ले जाना चाहते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित DPSU भवन में भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ भी संवाद किया। इसके अलावा, आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के दौरे के दौरान सैन्य चिकित्सा में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इससे स्पष्ट है कि सहयोग का दायरा केवल हथियार प्रणालियों तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा, प्रशिक्षण और परिचालन सहायता तक फैला हुआ है।
भारत–मोरक्को संबंधों में नया चरण
भारत और मोरक्को ने सितंबर 2025 में रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को का दौरा किया था। अब पहली संयुक्त रक्षा समिति बैठक के साथ उस समझौते को संस्थागत रूप मिल गया है। दोनों देश 2027 में अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं, इसलिए यह पहल द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने वाली मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त रक्षा समिति दो देशों के बीच रक्षा सहयोग पर चर्चा के लिए बनाया गया औपचारिक संस्थागत मंच होती है।
- DPSU का अर्थ Defence Public Sector Undertaking है, यानी भारत के सरकारी स्वामित्व वाले रक्षा उत्पादन उपक्रम।
- 2nd Bureau कई सेनाओं में सैन्य खुफिया और परिचालन स्टाफ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटक होता है।
- नई दिल्ली का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्वतंत्रता के बाद सेवा के दौरान शहीद हुए भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों को समर्पित है।
इस बैठक से भारत और मोरक्को के बीच रक्षा संबंधों में संवाद, तकनीक और औद्योगिक सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकती है।