ओडिशा में पांच ऑरंगुटान मिलने से वन्यजीव तस्करी पर सवाल

ओडिशा में पांच ऑरंगुटान मिलने से वन्यजीव तस्करी पर सवाल

ओडिशा के बालासोर जिले में 8 सितंबर 2026 को पांच युवा ऑरंगुटान मिलने का मामला वन्यजीव तस्करी और सीमा-पार अवैध व्यापार की आशंका को फिर चर्चा में ले आया है। वन विभाग ने भोगराई ब्लॉक के राणाकोठा संरक्षित आरक्षित वन से इन प्राइमेट्स को बचाया और बाद में उन्हें भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में क्वारंटीन और देखभाल के लिए भेज दिया।

कैसे मिला यह दुर्लभ मामला

अधिकारियों के अनुसार बचाए गए पांचों ऑरंगुटान में तीन नर और दो मादा शामिल हैं। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद गोघिनेनि ने समूह की संरचना की पुष्टि की, जबकि बालासोर के डीएफओ प्रतीक प्रकाश इंदलकर ने बताया कि चार जानवर भोजन कर रहे थे और स्वस्थ थे। एक ऑरंगुटान में हल्की डिहाइड्रेशन की स्थिति पाई गई, जिसका पशु चिकित्सकों ने उपचार किया।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रेम कुमार झा ने नंदनकानन में क्वारंटीन व्यवस्था की जानकारी दी। चूंकि ऑरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं, इसलिए यह माना जा रहा है कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के जरिए देश में लाए गए हो सकते हैं।

तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटी एजेंसियां

ओडिशा सरकार ने इस मामले में स्मगलिंग रूट का पता लगाने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो से जांच कराने का अनुरोध किया है। 9 सितंबर 2026 को ओडिशा क्राइम ब्रांच की स्पेशल टास्क फोर्स भी जांच में शामिल हुई और हवाई अड्डों, बंदरगाहों तथा रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा शुरू की।

वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है। ऐसे मामलों में एसटीएफ जैसी इकाइयां संगठित अपराध और वन्यजीव तस्करी की कड़ियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।

ऑरंगुटान क्यों हैं संरक्षण की बड़ी चिंता

ऑरंगुटान पोंगो वंश के महान वानर हैं और मूल रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं। ये दुनिया के सबसे अधिक संकटग्रस्त प्राइमेट्स में शामिल हैं और आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखे गए हैं। भारत में इनकी कोई प्राकृतिक जंगली आबादी नहीं है।

इनका परिवार होमिनिडी है, जिसमें गोरिल्ला, चिंपैंजी और मानव भी शामिल हैं। इसलिए इनका मिलना केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार की गंभीरता का भी संकेत देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है और एक प्रमुख संरक्षण केंद्र के रूप में जाना जाता है।
  • बालासोर जिला ओडिशा के उत्तरी हिस्से में है और इसकी सीमा बंगाल की खाड़ी से लगती है।
  • राणाकोठा संरक्षित आरक्षित वन बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक में स्थित है।
  • भारत में वन्यजीव व्यापार पर मुख्य रूप से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई होती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर CITES के प्रावधान लागू होते हैं।

यह मामला दिखाता है कि भारत में गैर-देशज प्रजातियों की मौजूदगी अक्सर अवैध तस्करी और सीमा-पार नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। अब जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना अहम होगा कि ये ऑरंगुटान देश में कैसे पहुंचे और इसके पीछे कौन-सा गिरोह सक्रिय था।

Originally written on September 9, 2026 and last modified on September 9, 2026.

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